logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

असम कैबिनेट का बड़ा कदम: UCC ड्राफ्ट बिल को दी हरी झंडी, 26 मई को होगा पेश

असम सरकार द्वारा प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) के बारे में विस्तार से जानकारी नीचे दी गई है:
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में इस मसौदा विधेयक (Draft Bill) को मंजूरी दी गई है। इसे 26 मई, 2026 को असम विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन पटल पर रखा जाएगा।
असम के UCC की 5 मुख्य बातें (Key Focus Areas)
असम का यह कानून मुख्य रूप से चार-पांच सामाजिक मुद्दों को सुधारने और व्यवस्थित करने के लिए लाया जा रहा है:
शादी की न्यूनतम उम्र (Minimum Age of Marriage): राज्य में सभी धर्मों और समुदायों के लिए लड़के और लड़कियों की शादी की एक न्यूनतम कानूनी उम्र तय की जाएगी।
बहुविवाह पर रोक (Abolition of Polygamy): नए कानून के तहत एक से अधिक शादी करने (बहुविवाह) पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण (Regulation of Live-in Relationships): जो जोड़े बिना शादी के साथ रहते हैं (लिव-इन), उनके लिए अपने रिश्ते का सरकारी पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य हो सकता है।
महिलाओं को संपत्ति का अधिकार (Inheritance Rights for Women): माता-पिता या पति की संपत्ति में महिलाओं और बेटियों को पुरुषों के बराबर हक देने का प्रावधान है।
शादी और तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: सभी के लिए विवाह और तलाक का सरकारी रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा।
किसे इस कानून से बाहर रखा गया है? (Exemptions)
असम की जनसांख्यिकी (Demographics) और संस्कृति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने "असम मॉडल" तैयार किया है, जिसके तहत कुछ विशेष छूट दी गई हैं:
आदिवासी समुदायों (Tribal Communities) को पूरी छूट: असम के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रहने वाले सभी आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि उनकी सदियों पुरानी अनोखी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक व्यवस्था पर कोई असर न पड़े।
धार्मिक रीति-रिवाज सुरक्षित: सरकार ने साफ किया है कि यह कानून केवल नागरिक अधिकारों (शादी, संपत्ति आदि) के लिए है। किसी भी समुदाय की धार्मिक पूजा-पद्धति, रस्मों या पारंपरिक त्योहारों में इसके जरिए कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
अन्य राज्यों से तुलना
उत्तराखंड, गोवा और गुजरात के बाद असम देश का ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइज्ड (विशेष रूप से तैयार) UCC लागू कर रहा है। गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से ही एक समान नागरिक कानून लागू है, जबकि उत्तराखंड ने हाल ही में इसे विधानसभा से पारित किया था।

0
0 views

Comment