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खमरिया बी-पैक्स समिति में यूरिया की कालाबाजारी के आरोप, आल इज वेल के दावों के बीच खाद के लिए भटकते किसान

लखीमपुर, खीरी। एक तरफ जिम्मेदार अधिकारी खाद वितरण व्यवस्था को लेकर ऑल इज वेल का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बी-पैक्स खमरिया समिति में यूरिया खाद को लेकर किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। घंटों लाइन में लगने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही, जबकि दलालों और कथित कालाबाजारियों को खुलेआम बड़ी मात्रा में यूरिया मिलने के आरोप लग रहे हैं।

समिति परिसर में शुक्रवार को किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली। किसानों का कहना था कि वह सुबह 9-10 बजे से लाइन में लग जाते हैं, आधार कार्ड और अंगूठा लगवाने की प्रक्रिया भी पूरी करते हैं, लेकिन शाम होते-होते यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि खाद खत्म हो गई। कई किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें 2 बोरी तक यूरिया नहीं दी जा रही, जबकि कुछ लोगों को 20-20 बोरी तक खाद उपलब्ध कराई जा रही है, समिति के अंदर प्राइवेट आदमी कार्य कर रहे है, सेटिंग वाले कारिन्दे अगल बगल लगे रहते है।
मौके पर मौजूद किसानों ने बताया कि यूरिया की बोरी 300 से 350 रुपये तक में ब्लैक की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समिति से टेम्पो और ऑटो रिक्शा में बड़ी मात्रा में खाद लादकर बाहर भेजी जा रही है, जिससे कालाबाजारी की आशंका और गहरी हो गई है। समिति परिसर के बाहर यूरिया से लदे वाहन और अंदर घंटों लाइन में खड़े किसान व्यवस्था की हकीकत खुद बयां कर रहे थे।
समिति में सदस्यता रखने वाले कई किसान भी लाइन में परेशान खड़े मिले। एक बुजुर्ग किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चार दिनों से लगातार समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक खाद नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा, बुजुर्ग आदमी हूं, कब तक लाइन में खड़ा रहूं?
नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जो किसान सरकारी रेट पर खाद लेना चाहते हैं, उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, जबकि सेटिंग वाले लोग कुछ अतिरिक्त पैसे देकर जितनी चाहें उतनी यूरिया ले जाते हैं। वही खाद बाद में किसानों को 500 से 550 रुपये प्रति बोरी तक बेची जाती है। किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा, सरकार किसानों के लिए योजनाएं बनाती है, लेकिन नीचे स्तर पर बैठे लोग ही पूरा खेल बिगाड़ देते हैं। यहां गरीब किसान का हक हजम हो जाता है।
वहीं समिति सचिव अनुपम ने कालाबाजारी के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सुबह से शाम तक लगातार खाद का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समिति पर किसान और दुकानदार दोनों आते हैं, ऐसे में सभी को तुरंत संतुष्ट कर पाना संभव नहीं है। अगर किसी किसान को आज खाद नहीं मिल पाती तो अगले दिन देने का प्रयास किया जाता है।
हालांकि किसानों का सवाल अब भी कायम है कि अगर व्यवस्था सच में ठीक है तो आखिर खाद के लिए रोजाना लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं? ऑटो में बड़ी मात्रा में बाहर जाती बोरियां किसके लिए हैं? यही सवाल अब स्थानीय किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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