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आदि अनादि काल से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आज भी प्रासंगिक और विविध लाभप्रद है सनातनी आयुर्वेदिक चिकित्सा--मोनिका शर्मा आभा

चंडीगढ़ शुक्रवार 15 मई 2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा हरीश शर्मा अश्वनी शर्मा ---- स्वास्थ्य दी हेल्थ की संचालिका मोनिका शर्मा आभा के अनुसार आधुनिकता भरी खोखली जीवन-शैली लिए भाग दौड़ और फास्ट फूड के दौर में आज का इंसान फिजिकल फिटनेस से कोसों दूर है। और हर तरह से बीमार है यह बीमारी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। बेस्ट आरएम कार्डियक अरेस्ट और लीवर किडनी फेलियर जीवन तो अपने चारों तरफ फैला हुआ है। लेकिन होम्योपैथी यूनानी एलोपैथी से लोग ऊब चुके हैं और डॉक्टरों की आर्थिक लूट खसूट और शारीरिक चीर फाड़ आदि से दुखी हो चुके हैं। थक हार कर आज का आधुनिक बहुत शिक्षित और धानाध्याय इंसान अपनी जड़ों की ओर आयुर्वेदिक की ओर लौट रहा है यह वही आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है जिसे हजारों हजारों सालों से सनातनी हिंदू ऋषि मुनि तपस्वी ध्यानी ज्ञानी व योगी सहित वैद्य आदि ने स्थापित किया था। महर्षि चरक और वैद्यनाथ मंत्री धनवंतरी जड़ीबूटियां के ज्ञाता जामवंत ऋषि वात्स्यायन आदि ने सनातनी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को पुष्ट कर प्रचलित किया है। आज 21वीं सदी में यही पुरातन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पुनः प्रचारित और प्रसारित होकर प्रस्थापित होने जा रही है। क्योंकि इसके परे जीवन का कोई अर्थ और सार्थ ही नहीं है। व्यस्ततम इस दौर में इंसान धनलोलूपता के आगोश में समा रहा है। पाश्चात्य शैली और आलस्य जीवन का कीड़ा बन चुका इंसान नाना प्रकार के असाध्याय रोगों का शिकार हो रहा है। इन सब में से सबसे घातक कार्डियक अरेस्ट यानी हृदयाघात है। हृदयाघात का मुख्य कारण खून का कई कारणों से गाढ़ा हो जाना है। आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्रमें हरियाणा के अंबाला में वैद्य किशोर कौशल और पंजाब की मोगा जिला के डॉक्टर अमरीकसिंह कांडा नामचीन हैं। डाक्टर अमरीक सिंह कांडा ने हृदय आघात के रोगियों को सतर्क करते हुए कहा है कि इस रोग से पाला ना पड़े, इसके लिए खून को गाढ़ा नहीं होने देना चाहिए। खून पतला करने के लिए एलोपैथी चिकित्सा में एस्प्रिन जैसी दवाई आजकल हर घर की जरूरत बन चुकी हैं। डाक्टर ने चेताया कि सावधान रहें यदि आप पहले से ही खून पतला करने वाली दवाएं (जैसे एस्पिरिन, वारफेरिन) ले रहे हैं। तो आयुर्वेद के इन घरेलू उपायों को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें, क्योंकि आयुर्वेद नुस्खे के साथ मिलाकर लेने से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। संलग्न चार्ट में डाक्टर अमरीक सिंह ने खून को पतला रखने के लिए जड़ी बूटियां के काढ़े के प्रयोग को सर्वोत्तम और जल्दी व लंबे समय तक असरदार तरकीब माना है। चिंता से परे सबसे बड़ी बात है कि आयुर्वेदिक दवा का वैद्यों मुताबिक उपयोग करने से किसी प्रकार का भी शरीर पर साइड इफेक्ट नहीं पड़ता है। साभार अल्फा न्यूज़ इंडिया----।।आदि अनादि काल से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आज भी प्रासंगिक और विविध लाभप्रद है सनातनी आयुर्वेदिक चिकित्सा---मोनिका शर्मा आभा स्वास्थ्य दी हेल्थ।।।।।।

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