रायगढ़। शहर के नामी 'डॉ. आलोक केडिया सोनोग्राफी सेंटर' में मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का एक खौफनाक
रायगढ़। शहर के नामी 'डॉ. आलोक केडिया सोनोग्राफी सेंटर' में मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का एक खौफनाक खेल चल रहा है। फेसबुक लाइव और सोशल मीडिया पर फूटे जनता के गुस्से ने इस सेंटर की तानाशाही की पोल खोल दी है। सेंटर में बिना एडवांस पैसे के किसी भी मरीज की एंट्री नहीं होती। मरीजों को झांसे में रखकर क्षमता से कई गुना ज्यादा लोगों की पर्ची काट दी जाती है। हालत यह है कि घंटों के लंबे इंतजार से मरीज इतना प्रताड़ित हो जाते हैं कि वे अपनी जमा की हुई भारी-भरकम फीस वहीं छोड़कर बिना सोनोग्राफी कराए वापस लौटने में ही अपनी भलाई समझते हैं।
बिना पैसे एंट्री नहीं, झांसे में रखते हैं
जानकारी के अनुसार, इस सेंटर में इलाज से पहले पैसों की वसूली पर पूरा फोकस होता है। किसी भी मरीज की बिना एडवांस पेमेंट के एंट्री नहीं होती। सोनोग्राफी का चार्ज 1200 रुपये से शुरू होता है। दूर-दराज के गांवों से आए मरीजों को पहले इस झांसे में रखा जाता है कि उनका नंबर जल्दी आ जाएगा, और इस तरह उनसे पहले ही पैसे जमा करवा लिए जाते हैं।
क्षमता से ज्यादा पर्ची और 'No Refund' का खेल
पैसों की हवस इस कदर हावी है कि सेंटर को अपनी क्षमता (Capacity) का पता होने के बावजूद, वे दिन भर में लिमिट से कई गुना ज्यादा मरीजों की पर्ची काट देते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सेंटर ने अपनी रसीद पर और अंदर एक बोर्ड लगाकर इस बात को हाईलाइट किया हुआ है कि "पैसा वापस नहीं होगा" (No Refund)। यानी एक बार उन्होंने आपको झांसे में लेकर पैसे ले लिए, तो आप उनकी शर्तों में पूरी तरह फंस जाते हैं।
प्रताड़ना ऐसी कि पैसा छोड़कर भाग रहे मरीज
पैसा जमा करने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। सुबह 10 बजे पैसा देने वाला मरीज शाम के 6 बजे तक दर्द से तड़पता रहता है। इस लंबे इंतजार और सेंटर के स्टाफ की बदतमीजी से मरीज इस कदर प्रताड़ित हो जाते हैं कि उनका सब्र टूट जाता है। अंत में, 'पैसा वापस नहीं होगा' वाले नियम के सामने मजबूर होकर, कई मरीज अपना जमा किया हुआ 1200 से ज्यादा का पैसा सेंटर में ही छोड़कर, बिना सोनोग्राफी कराए वापस लौटने में भलाई समझते हैं। सेंटर संचालक इसी 'फ्री के पैसे' और मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
500 रुपये में 'VIP एंट्री'
एक तरफ आम मरीज दिन भर तड़पता रहता है, वहीं दूसरी तरफ सेंटर में एक 'पैरेलल सिस्टम' चल रहा है। फेसबुक पर जनता ने खुलासा किया है कि अगर किसी को जल्दी सोनोग्राफी करवानी है, तो 400 से 500 रुपये की घूस देकर 'VIP नंबर' लगवा लिया जाता है। ऐसे में नियम से अपनी बारी का इंतजार करने वाले मरीज बस देखते रह जाते हैं।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और CMHO इस 'No Refund' और क्षमता से ज्यादा बुकिंग वाले मेडिकल फ्रॉड पर कोई सख्त कार्रवाई करते हैं या नहीं।