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हिंदी कविता : रहनुमा

रहनुमा वह नहीं
जो केवल रास्ता दिखा दे,
रहनुमा तो वह होता है
जो अंधेरों में भी
उम्मीद का दीप जलाए रखे।

जब जिंदगी की राहें
काँटों से भर जाती हैं,
जब अपने भी
पराये लगने लगते हैं,
जब हर तरफ मायूसी का धुआँ हो,
तब कोई एक आवाज़
धीरे से दिल में उतरती है
डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ।
वही आवाज़
रहनुमा बन जाती है।

रहनुमा सूरज की तरह होता है,
जो खुद जलकर
दूसरों को उजाला देता है।
वह नदी की तरह होता है,
जो हर प्यासे को
बिना भेदभाव के पानी देती है।
वह पेड़ की तरह होता है,
जो धूप में खड़ा रहकर भी
दूसरों को छाँव देता है।

कभी माँ
हमारी पहली रहनुमा बनती है,
जो उँगली पकड़कर
चलना सिखाती है।
कभी पिता
जीवन की कठिन राहों में
हौसले की दीवार बन जाते हैं।
कभी शिक्षक
ज्ञान की लौ जलाकर
भविष्य को दिशा देते हैं।
और कभी कोई दोस्त
टूटे हुए मन को संभालकर
जीने की वजह बन जाता है।

रहनुमा केवल इंसान नहीं होते,
किताबें भी रहनुमा बनती हैं।
इतिहास के पन्ने,
महापुरुषों के विचार,
कवियों की कविताएँ,
संतों की वाणी
ये सब जीवन को
नई राह दिखाते हैं।

जब समाज भटकने लगे,
जब नफरत का अंधेरा
दिलों पर छाने लगे,
तब एक सच्चा रहनुमा
प्रेम और इंसानियत का संदेश देता है।
वह लोगों को बाँटता नहीं,
बल्कि जोड़ता है।
वह ऊँच-नीच नहीं देखता,
सिर्फ इंसानियत देखता है।

रहनुमा की पहचान
उसके शब्दों से नहीं,
उसके कर्मों से होती है।
जो दूसरों के दुख में
खुद को शामिल कर ले,
जो गिरते हुए को संभाल ले,
जो निराश दिलों में
आशा भर दे
असल में वही रहनुमा है।

कई बार
हम रास्ता भूल जाते हैं,
सपने टूट जाते हैं,
हिम्मत हार जाते हैं।
लेकिन तभी कोई
हमारे अंदर सोई हुई ताकत को जगाता है,
और कहता है
तुम हारने के लिए नहीं बने।
वही व्यक्ति
हमारी जिंदगी का रहनुमा बन जाता है।

रहनुमा बनने के लिए
बड़ा नाम होना जरूरी नहीं,
बड़ा दिल होना जरूरी है।
एक छोटी-सी मुस्कान,
एक सच्ची सलाह,
एक नेक काम
किसी की जिंदगी बदल सकता है।

आओ हम भी
किसी के रहनुमा बनें।
किसी उदास चेहरे पर
मुस्कान बनकर उतरें,
किसी भटके हुए को
सही राह दिखाएँ,
किसी टूटे हुए दिल को
हिम्मत का सहारा दें।

क्योंकि दुनिया को
सिर्फ अमीर लोगों की नहीं,
अच्छे रहनुमाओं की जरूरत है।
ऐसे रहनुमा
जो इंसानियत का दीप जलाएँ,
जो प्रेम की राह दिखाएँ,
और जो इस दुनिया को
नफरत नहीं,
मोहब्बत से सजाएँ।

जिस दिन हर इंसान
दूसरों के लिए
रहनुमा बन जाएगा,
उस दिन यह धरती
सचमुच जन्नत बन जाएगी।

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