हिंदी कविता : रोशनी
रोशनी केवल दीपों की लौ नहीं होती,
यह उम्मीद की वह किरण होती है
जो टूटे हुए मन को फिर से जीना सिखाती है।
जब जीवन की राहों पर अंधेरा छा जाता है,
तब यही रोशनी
धीरे से हाथ पकड़कर कहती है
चलो, अभी सफर बाकी है।
सुबह की पहली किरण में
एक नया विश्वास छिपा होता है,
जैसे प्रकृति हर दिन
नई शुरुआत का संदेश देती हो।
सूरज जब आसमान में उगता है,
तो केवल धरती ही नहीं चमकती,
बल्कि इंसान के सपनों में भी
नई ऊर्जा भर जाती है।
रोशनी मंदिर की आरती में भी है,
मस्जिद की अज़ान में भी,
गुरुद्वारे की वाणी में भी,
और गिरजाघर की प्रार्थना में भी।
यह किसी एक धर्म या एक इंसान की नहीं,
यह पूरी मानवता की धड़कन है।
जहाँ प्रेम है,
जहाँ दया है,
जहाँ इंसानियत है
वहीं सच्ची रोशनी है।
एक छोटा-सा दीपक
पूरे अंधेरे को मिटा तो नहीं सकता,
लेकिन वह यह ज़रूर बता देता है
कि अंधेरा कितना भी गहरा हो,
प्रकाश की एक लौ काफी होती है।
इसी तरह एक अच्छा विचार,
एक मीठा शब्द,
एक सच्चा कर्म
कई दिलों में उजाला भर सकता है।
रोशनी किताबों में भी बसती है,
ज्ञान के शब्दों में चमकती है।
जब कोई बच्चा पढ़ना सीखता है,
तो उसके भविष्य में
उम्मीद का सूरज उगता है।
अज्ञानता का अंधेरा
धीरे-धीरे मिटने लगता है,
और जीवन नई दिशा पा लेता है।
कभी-कभी इंसान के भीतर भी
घना अंधकार छा जाता है
निराशा, डर, अकेलापन और दुख।
पर उसी समय
यदि कोई अपना साथ दे दे,
एक मुस्कान दे दे,
एक भरोसा जगा दे,
तो मन के कोनों में भी
रोशनी लौट आती है।
दीवाली की जगमगाती रात हो
या गाँव की शांत शाम,
रोशनी हर जगह
अपनी कहानी कहती है।
वह कहती है
जलना ही जीवन है।
जो दीप खुद जलता है,
वही दूसरों को उजाला देता है।
हमें भी ऐसा ही बनना होगा
अपने ज्ञान से,
अपने प्रेम से,
अपने कर्म से
दूसरों के जीवन में प्रकाश भरना होगा।
क्योंकि दुनिया को
सिर्फ बिजली की नहीं,
अच्छे विचारों की रोशनी भी चाहिए।
आओ ऐसा दीप जलाएँ
जो नफरत को मिटा दे,
जो दिलों को जोड़ दे,
जो इंसान को इंसान से मिला दे।
तभी यह धरती
सचमुच रोशनी से भर जाएगी।
रोशनी केवल आँखों से नहीं देखी जाती,
उसे दिल से महसूस किया जाता है।
और जिस दिन
मन के भीतर प्रेम का दीप जल उठेगा,
उस दिन हर दिशा में
सिर्फ उजाला ही उजाला होगा।