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आयात शुल्क बढ़ने से तस्करी व महंगाई बढ़ने की आशंका : विनोद वर्मा

AW NEWS नई दिल्ली: सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने की चर्चाओं के बीच बिहार स्वर्णकार समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद वर्मा ने कहा कि राष्ट्रहित में लिए गए हर निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसे आर्थिक कदमों के दीर्घकालिक प्रभावों का व्यावहारिक और संतुलित मूल्यांकन भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उद्योग के अनुभव और पूर्व के उदाहरण बताते हैं कि आयात शुल्क में अत्यधिक वृद्धि शायद ही कभी सोने के आयात को वास्तविक रूप से कम कर पाती है। इसके विपरीत, ऐसे कदम अक्सर तस्करी, अनौपचारिक व्यापार और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत बढ़ाने का कारण बनते हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में भारी वृद्धि और लगभग दोगुनी कीमतों के बावजूद आयात उसी अनुपात में कम नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि केवल कठोर शुल्क वृद्धि दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकती। अत्यधिक आयात शुल्क से कई बार सरकार को अपेक्षित राजस्व लाभ भी नहीं मिल पाता, जबकि वैध व्यापार प्रभावित होता है और अवैध चैनलों को बढ़ावा मिलने की आशंका बढ़ जाती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार का उद्देश्य वास्तव में आयात निर्भरता कम करना है, तो पुराने आभूषणों की रीसाइक्लिंग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए तथा Gold Monetisation Scheme को अधिक सरल, आकर्षक और जनसुलभ बनाया जाना चाहिए।
भारत के घरों और institutions में बड़ी मात्रा में निष्क्रिय सोना मौजूद है। यदि organised gold recycling ecosystem और Gold Monetisation Scheme को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, तो आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है, बिना उपभोक्ताओं और उद्योग पर अतिरिक्त बोझ डाले।

ज्वेलरी उद्योग देश में लाखों कारीगरों, छोटे व्यापारियों, MSME इकाइयों और पारंपरिक स्वर्णकार परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी भी नीति का उद्देश्य वैध व्यापार को मजबूत करना और अवैध गतिविधियों को हतोत्साहित करना होना चाहिए।

इस विषय पर स्वर्ण व्यवसायी बिट्टू वर्मा, संजय वर्मा, प्रेम वर्मा, राजेश वर्मा , सुनील वर्मा, लड्डू वर्मा , लालजी वर्मा, रोहित वर्मा, अभिषेक वर्मा ,मनोज वर्मा के साथ अन्य व्यावसायियों ने भी समान राय व्यक्त करते हुए कहा कि संतुलित नीति, रीसाइक्लिंग और Gold Monetisation जैसे व्यावहारिक उपाय ही देश और उद्योग दोनों के हित में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

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