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NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द: 23 लाख छात्रों के भविष्य पर संकट, पेपर लीक माफिया पर उठे बड़े सवाल

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। पेपर लीक और व्हाट्सऐप ग्रुपों में प्रश्नपत्र वायरल होने के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द किए जाने की खबर ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरे तनाव में डाल दिया है।

करीब 23 लाख छात्र-छात्राओं ने इस परीक्षा में भाग लिया था। इन बच्चों के साथ उनके माता-पिता की वर्षों की मेहनत, सपने और आर्थिक संघर्ष भी जुड़े हुए हैं। मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए लाखों रुपये की कोचिंग फीस भरते हैं, कई लोग कर्ज तक लेते हैं। ऐसे में अगर पैसे और पहुंच के दम पर पेपर पहले से बिकने लगें, तो यह केवल परीक्षा प्रणाली नहीं बल्कि देश की प्रतिभा और ईमानदार मेहनत पर सीधा हमला माना जाएगा।

लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सुरक्षा एजेंसियां छोटी-छोटी चीजों की गहन जांच कर लेती हैं, लेकिन सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुपों में घूम रहे पेपर लीक नेटवर्क तक क्यों नहीं पहुंच पातीं। इससे परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। कई लोगों का कहना है कि यदि पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो मेहनती और प्रतिभाशाली छात्रों का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में फैल चुके संगठित भ्रष्ट नेटवर्क का संकेत है। अगर दोषियों की पहचान कर उन्हें कठोर सजा नहीं दी गई, तो भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

अब देशभर के छात्र और अभिभावक सरकार और जांच एजेंसियों से पारदर्शी जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

आपकी इस पूरे मामले पर क्या राय है? क्या पेपर लीक करने वालों पर आजीवन प्रतिबंध और कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए?

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