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अगर आपको क्राइम-थ्रिलर, 90s यूपी का रॉ माहौल और दमदार पुलिस-गैंगस्टर टकराव पसंद है, तो Inspector Avinash इस बार पहले से ज्यादा डार्क, इमोशनल और हिंसक

अगर आपको क्राइम-थ्रिलर, 90s यूपी का रॉ माहौल और दमदार पुलिस-गैंगस्टर टकराव पसंद है, तो Inspector Avinash इस बार पहले से ज्यादा डार्क, इमोशनल और हिंसक अंदाज़ में वापस आया है।
इस सीज़न में Randeep Hooda ने एक बार फिर इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा के किरदार को उसी बेखौफ अंदाज़ में जिया है, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ अपराधियों को खत्म करने तक सीमित नहीं रहती मामला सीधे उसके परिवार और सिस्टम के भीतर के विश्वासघात तक पहुंच जाता है।

सीज़न 2 की सबसे बड़ी ताकत इसका माहौल है।
1990 के दशक का उत्तर प्रदेश, धूल-मिट्टी वाली सड़कें, राजनीतिक संरक्षण में पलता अपराध और पुलिस-माफिया की खतरनाक जंग सीरीज़ हर फ्रेम में असली लगती है। डायरेक्टर नीरज पाठक ने कहानी को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सत्ता, डर और भ्रष्ट सिस्टम की परतें भी दिखाई हैं।

इस बार कहानी एक बड़े हथियार तस्करी नेटवर्क और राजनीतिक साज़िश के इर्द-गिर्द घूमती है। जहां पहले सीज़न में एनकाउंटर और गैंगवार ज्यादा थे, वहीं इस बार कहानी ज्यादा पर्सनल हो जाती है। अविनाश का अपने ही परिवार से जुड़ा संघर्ष सीरीज़ को भावनात्मक गहराई देता है।

एक्शन सीक्वेंस बेहद रॉ और बिना ज्यादा स्टाइलाइजेशन के शूट किए गए हैं। गोलीबारी, पीछा करने वाले सीन और पुलिस ऑपरेशन काफी वास्तविक लगते हैं। बैकग्राउंड स्कोर तनाव बनाए रखता है और कई जगह सन्नाटा भी डर पैदा करता है।

हालांकि सीरीज़ कुछ जगह धीमी भी पड़ती है।
कुछ एपिसोड में राजनीतिक बातचीत और लंबी जांच कहानी की गति कम करती है। कुछ सपोर्टिंग किरदारों को और बेहतर लिखा जा सकता था। लेकिन जब भी स्क्रीन पर अविनाश मिश्रा आता है, सीरीज़ फिर से पकड़ बना लेती है।

Urvashi Rautela और बाकी सपोर्टिंग कास्ट ठीक काम करती है, लेकिन पूरा शो असल में Randeep Hooda के कंधों पर टिका हुआ है। उनका स्क्रीन प्रेजेंस इस सीज़न की जान है।

क्यों देखें?

रियलिस्टिक क्राइम ड्रामा

दमदार डायलॉग्स

90s यूपी का असली माहौल

शानदार एक्शन और इंटेंस अभिनय

पर्सनल और राजनीतिक संघर्ष का अच्छा मिश्रण

कमज़ोर पक्ष:

कुछ एपिसोड लंबे महसूस होते हैं

सपोर्टिंग किरदारों की डेप्थ कम

बीच-बीच में कहानी स्लो हो जाती है

रेटिंग: (4/5)

इंस्पेक्टर अविनाश 2 सिर्फ अपराधियों से लड़ाई नहीं, बल्कि सिस्टम और अपने अंदर के डर से जंग की कहानी है।

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