जिला परिषद की जमीन पर कब्जे की साजिश बर्दाश्त नहीं, संरक्षण की लड़ाई जारी रहेगी : कृष्णा कुमारी यादव
|| भूमाफियाओं और धन्ना सेठों के खिलाफ जिप अध्यक्ष का बड़ा हमला, बस स्टैंड से ट्रेंचिंग ग्राउंड तक कई भूखंडों पर जताया दावा ||
AIMA न्यूज
खगड़िया (बिहार),14 मई।
जिला परिषद अध्यक्ष सह जिप अध्यक्ष संघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती कृष्णा कुमारी यादव ने गुरुवार को थाना रोड स्थित जिला परिषद कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जिला परिषद की बहुमूल्य भू-संपदाओं पर कब्जे की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में किसी भी कीमत पर जिला परिषद की जमीनों पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिला परिषद की संपत्तियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा और भूमाफियाओं को बेनकाब कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि खगड़िया नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जिला परिषद की करोड़ों की भूमि पर भूमाफियाओं एवं धन्ना सेठों की नजर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में श्यामलाल ट्रस्ट, अवध बिहारी संस्कृत महाविद्यालय तथा सन्हौली गोशाला जैसी संस्थाओं की जमीनों में जमाबंदी में हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर अवैध खरीद-बिक्री की गई और लोगों ने अकूत संपत्ति अर्जित की। इतना ही नहीं, शत्रु संपदा, गैरमजरूआ आम-खास, टोपोलैंड और सर्वे भूमि तक को अपने नाम कर बेचने का खेल चला।
उन्होंने कहा कि अब कुछ अधिकारी एवं पदाधिकारी की मिलीभगत से जिला परिषद की जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने दिया जाएगा।
|| बलुआही बस स्टैंड की जमीन पर जिला परिषद का दावा ||
जिप अध्यक्ष ने कहा कि बलुआही बस स्टैंड स्थित जिला परिषद की भूमि, जिसका मौजा हाजीपुर, खाता संख्या 153, खेसरा संख्या 131 एवं खाता संख्या 160, खेसरा संख्या 132 में दर्ज है, जिला परिषद की वैध संपत्ति है। उन्होंने बताया कि खगड़िया जिला गठन से पूर्व यह भूमि जिला परिषद मुंगेर के अधीन थी और जिला गठन के बाद इस पर जिला परिषद खगड़िया का स्वामित्व स्थापित हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1989 में जिला योजना मद से बस पड़ाव का निर्माण तो कराया गया, लेकिन जिला परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया। बाद में एक सुनियोजित साजिश के तहत नगर परिषद को बस स्टैंड की बंदोबस्ती और वसूली का अधिकार दे दिया गया।
उन्होंने बताया कि इस मामले में नगर परिषद द्वारा जिला लोक निवारण समिति में वाद संख्या 02/2014 दायर किया गया है, जो अभी विचाराधीन है। ऐसे में विवादित भूमि पर आधुनिक बस स्टैंड का शिलान्यास न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
|| राजेंद्र चौक और बूढ़ी गंडक किनारे की भूमि भी जिला परिषद की ||
श्रीमती यादव ने कहा कि बूढ़ी गंडक नदी के उत्तरी किनारे से कचरदेवा तक की सड़क डिस्ट्रिक्ट बोर्ड, मुंगेर की संपत्ति पंजी में दर्ज है। वहीं राजेंद्र चौक स्थित भूखंड भी जिला परिषद की भूमि है।
उन्होंने कहा कि वहां पांच फीट जगह छोड़कर अस्थायी संरचना लगाने की अनुमति दी गई है ताकि लोगों को धूप और बारिश से राहत मिल सके। भविष्य में कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स निर्माण के दौरान इसे हटा दिया जाएगा।
|| ट्रेंचिंग ग्राउंड की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप ||
उन्होंने बताया कि दावन टोल स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड की छह बीघा से अधिक भूमि जिला परिषद की है, जहां महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज निर्माण का प्रस्ताव पूर्व में पारित किया गया था। लेकिन कुछ भूमाफियाओं ने साजिश के तहत लोगों को बसाकर पक्के मकान बनवा दिए। इस मामले में पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।
|| नगर परिषद कार्यालय की जमीन पर भी जताया स्वामित्व ||
जिप अध्यक्ष ने दावा किया कि नगर परिषद कार्यालय एवं उससे सटी परती भूमि भी जिला परिषद की संपत्ति है। इस संबंध में विभागीय निर्देश के आलोक में किराया मांगते हुए पत्र भेजा गया है तथा किसी प्रकार के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है।
|| जिला परिषद की संपत्ति हस्तांतरित करने का अधिकार राज्य सरकार को भी नहीं ||
श्रीमती यादव ने कहा कि जिला परिषद की संपत्ति को किसी अन्य विभाग को हस्तांतरित करने का अधिकार राज्य सरकार को भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि मानसी, गोगरी और जमालपुर अनुमंडल कार्यालय सहित कई सरकारी संस्थान जिला परिषद की जमीन पर संचालित हैं।
उन्होंने बेलदौर बाजार विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां वास्तविक विवाद नहीं है, बल्कि कुछ लोग दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक वाहवाही लूटना चाहते हैं।
|| बिहार के अधिकांश जिलों में बस स्टैंड जिला परिषद के अधीन ||
उन्होंने कहा कि बिहार के अधिकांश जिलों में बस स्टैंड जिला परिषद के अधीन संचालित होते हैं। कई जगह नगर परिषद जिला परिषद को किराया देकर उनकी जमीन का उपयोग करती है। नगर पालिका अधिनियम की धारा 100 में भी जिला परिषद की संपत्ति पर नगर परिषद को कोई अधिकार नहीं दिया गया है।