हिमाचल के एंटी चिट्टा मॉडल से सीखेंगे अन्य राज्य, एनसीबी ने मांगा विस्तृत विवरण
हिमाचल के एंटी चिट्टा मॉडल से सीखेंगे अन्य राज्य, एनसीबी ने मांगा विस्तृत विवरण
रिपोर्ट : देवेश आर्य, मंडी (हिमाचल प्रदेश)
शिमला : 14 मई 2026
हिमाचल प्रदेश सरकार का एंटी चिट्टा मॉडल अब देशभर के लिए अध्ययन का विषय बनने जा रहा है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के रीजनल ऑफिस ने इस मॉडल की विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगी है, ताकि अन्य राज्यों में भी इसे लागू कर नशा तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के नेतृत्व में प्रदेश में चिट्टा (हेरोइन) के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया है। इसके तहत पंचायत स्तर तक मैपिंग कर नशा तस्करों और उपयोगकर्ताओं की पहचान की गई और उन्हें रेड, येलो व ग्रीन श्रेणी में वर्गीकृत किया गया। प्रदेश की 234 पंचायतों को चिट्टा प्रभावित (रेड जोन) के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां पुलिस निगरानी को और अधिक सख्त किया गया है।
इस मॉडल के तहत न केवल अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिट-एनडीपीएस एक्ट के तहत 174 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जो देश में सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नशा तस्करों की करीब 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं, जो पहले की तुलना में तीन गुना अधिक है। 700 से अधिक मामलों की जांच में से 300 मामलों को आर्थिक जांच और संपत्ति जब्ती के लिए उपयुक्त पाया गया है।
राज्य सरकार एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ के सहयोग से सिरमौर के कोटला बड़ोग में आधुनिक पुनर्वास केंद्र विकसित कर रही है। साथ ही शिमला के मशोबरा और कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज में भी नए पुनर्वास केंद्र शुरू किए जा रहे हैं।
स्कूलों और कॉलेजों में ड्रग फ्री कैंपस अभियान, एंटी ड्रग शपथ और एंटी ड्रग सेल के माध्यम से युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि समाज के सहयोग से यह अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है।
एनसीबी द्वारा इस मॉडल को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताते हुए इसका अध्ययन किया जा रहा है, जिससे देशभर में नशा उन्मूलन की रणनीति को और मजबूत किया जा सके।