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महिलाओं के अवैतनिक उत्पादक कार्य की सामाजिक मान्यता आवश्यक- डॉ शीला यादव

महिलाओं के अवैतनिक उत्पादक कार्य की सामाजिक मान्यता आवश्यक- डॉ शीला यादव

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी समाजशास्त्र विभाग द्वारा लिंग, कार्य और अदृश्य अर्थव्यवस्था : भारत में महिलाओं की भूमिका विषय पर एक विशेष सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष सह संकायाध्यक्ष प्रो ध्रुव कुमार ने किया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र विभाग की डॉ शीला यादव ने अपने व्याख्यान में भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं के अदृश्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि घरेलू कार्यों और देखभाल की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बड़ी भूमिका होने के बावजूद, अक्सर इसे की भागीदारी और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की चुनौतियों पर बल दिया। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों के कार्यो और अवसरों के बीच अंतर की विस्तार से चर्चा की और इन अन्तरों को दूर करने के उपायों के बारे में बताया। उन्होंने लिंग असमानता को कम करने के लिए विभिन्न देशों के द्वारा किए जाने वाले प्रयासों के बारे में विस्तृत चर्चा की। अध्यक्षीय भाषण में प्रो ध्रुव कुमार ने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लैंगिक समानता और महिलाओं के श्रम का उचित मूल्यांकन अनिवार्य है। उन्होंने समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से श्रम विभाजन की बारीकियों को समझाया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ प्रमोद गांधी द्वारा किया गया। स्वागत संबोधन में विभागीय शिक्षिका और कार्यक्रम संयोजिका डॉ लक्ष्मी कुमारी ने मुख्य अतिथि एवं उपस्थित विद्वानों का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने महिलाओं को अपने कार्यों और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। अंत में विभाग की शिक्षिका डॉ सुनीता कुमारी ने अतिथियों, प्रतिभागियों और शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में ऐसे उत्कृष्ट कार्यक्रमों के संचालन की बात की। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक, बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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