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कुशलगढ़ धर्मांतरण प्रकरण में 6 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ में चर्चित धर्मांतरण एवं गोसेवकों पर हमले के मामले में एडीजे कोर्ट ने छह आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एडीजे न्यायाधीश रविकांत जिंदल ने सुनवाई के बाद आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी। मामले में आरोपी अनिल खबद, नीरज डामोर, दिलीप रावत, बरेदा डामोर, प्रवीण डामोर और पंकज डामोर की ओर से 12 मई को जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष की ओर से लोक अभियोजक ईश्वरदत्त पटेल ने जमानत का विरोध किया। वहीं प्रार्थी पक्ष की ओर से अधिवक्ता भूपेंद्र त्रिपाठी ने अदालत में फोटो, वीडियो सीडी और दो गवाहों के शपथ पत्र पेश किए।

रिपोर्ट के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को प्रलोभन देकर सामूहिक धर्मांतरण कराने का प्रयास किया, जो राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2025 के तहत गंभीर अपराध माना गया है।

अभियोजन पक्ष ने अधिनियम की धारा 3, 5 और 7(2)(ख) का हवाला देते हुए कहा कि इस अपराध में न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

गौरतलब है कि यह मामला 1 मई को सामने आया था। गोसेवकों को कुशलगढ़ क्षेत्र में गोकशी की सूचना मिली थी, जिसके बाद कुछ गोसेवक मौके पर पहुंचे। आरोप है कि वहां धर्मांतरण को लेकर सभा चल रही थी और करीब 100 लोग मौजूद थे।

बताया गया कि गोसेवकों के पहुंचने पर विवाद बढ़ गया और उन पर हमला कर दिया गया। इस घटना में तीन गोसेवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद गोसेवक रवि भामोर की रिपोर्ट पर पुलिस ने 15 नामजद सहित करीब 100 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

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