वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए सोने और चांदी के आयात शुल्क (Import Duty) को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है।
भारत सरकार ने देश में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए सोने और चांदी के आयात शुल्क (Import Duty) को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन (पेट्रोल-डीजल) बचाने और अनावश्यक रूप से सोने की खरीदारी को टालने की अपील के ठीक बाद उठाया गया है।
वैश्विक संकट के बीच देश को आर्थिक स्थिरता देने की तैयारी; ईंधन संकट की अटकलें तेज़.
नई दिल्ली:पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक तेल बाजारों में जारी अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लिया है। देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए सरकार ने सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाले टैक्स को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। इस बड़े कदम का सीधा उद्देश्य भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) की बचत करना और डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती देना है।
पीएम मोदी की 'आर्थिक देशभक्ति' की अपील.
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से पेट्रोल और डीजल का सीमित व समझदारी से उपयोग करने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से कम से कम एक साल तक गैर-ज़रूरी सोना न खरीदने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद से ही आम जनता और बाजार विशेषज्ञों के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है। लोग यह आशंका जता रहे हैं कि क्या आने वाले समय में देश को पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत (सप्लाई संकट) का सामना करना पड़ सकता है, या फिर तेल कंपनियां कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने जा रही हैं।
महंगाई से राहत और सरकार का रुखईंधन की कीमतों को लेकर जनता में भले ही असमंजस की स्थिति बनी हो, लेकिन सरकार ने अब तक पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सरकार का पूरा प्रयास जनता को वैश्विक महंगाई के सीधे असर से बचाना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बावजूद घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को यथासंभव नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।आयात शुल्क में 15% इजाफे की मुख्य वजहकेंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा लागू किए गए इस नए नियम के तहत प्रभावी सीमा शुल्क को सीधे 15% तक बढ़ा दिया गया है।
ऐसा इसलिए किया गया है ताकि:कीमती धातुओं के आयात पर होने वाले भारी-भरकम खर्च (डॉलर आउटफ्लो) को नियंत्रित किया जा सके।घरेलू बाजार में सोने-चांदी की अनावश्यक मांग में थोड़ी कमी लाई जा सके।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और अनिश्चितताओं के बीच देश के वित्तीय संतुलन को बनाए रखा जा सके।
इस पूरी रणनीति से यह साफ झलकता है कि भारत के समक्ष तात्कालिक आर्थिक चुनौतियां ज़रूर हैं। सरकार इन समस्याओं के विकराल होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते कड़े और दूरदर्शी फैसले लेकर संकट से निपटना चाहती है।
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