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अँधेरे में रोशनी की तलाश बिहार के 6 जिलों में ब्लैकआउट मॉकड्रिल: सतर्कता या संकट का संकेत?

अँधेरे में रोशनी की तलाश

विजय कुमार वरिष्ठ पत्रकार

पटना: आज गुरुवार की शाम जब सूरज ढलेगा, उससे पहले ही बिहार के 6 जिलों पटना, पूर्णिया, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और अरारिया की रोशनी जानबूझकर बुझा दी जाएगी।
शाम ठीक 7 बजे, सायरन की तीखी आवाज़ के साथ बिजली काट दी जाएगी।
यह कोई बिजली संकट नहीं, यह कोई आपदा नहीं यह है भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित सिविल डिफेंस मॉकड्रिल।

लेकिन सवाल यह है कि यह 'अभ्यास' महज एक रस्म है, या सच में हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ हर नागरिक को युद्धकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा।

पृष्ठभूमि:
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान तनाव,
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
इस हमले में 26 निर्दोष नागरिक जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था मौत के घाट उतार दिए गए।
इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के 9 ठिकानों को तबाह किया।

इस सैन्य कार्रवाई के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल बना। इसी पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय ने देशभर के 244 जिलों में नागरिक सुरक्षा मॉकड्रिल का निर्देश जारी किया।
बिहार के 6 जिले इसी राष्ट्रव्यापी तैयारी का हिस्सा हैं।

जब तोप की आवाज़ दूर हो, तब भी दिया बुझाने की तैयारी में रहो यही है असली सुरक्षा संस्कृति।

मॉकड्रिल का खाका:
क्या करना है, क्या नहीं?
आज शाम 7:00 बजे से 7:15 बजे तक यानी पूरे 15 मिनट पटना सहित 6 जिलों में पूर्ण ब्लैकआउट रहेगा।

इस दौरान नागरिकों को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना होगा:
घर, दुकान, ऑफिस सभी जगह लाइटें बंद करें, यहाँ तक कि इनवर्टर की बत्ती भी।

मोबाइल फोन के डिस्प्ले का उपयोग भी न्यूनतम करें।
सड़क पर वाहन रोकें, हेडलाइट बंद करें या मद्धम करें।
सायरन सुनते ही घबराएं नहीं यह मॉकड्रिल है, वास्तविक आपात स्थिति नहीं।
अफवाह न फैलाएं, सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट से बचें।
बिहार में इस अभ्यास की तैयारी का जिम्मा सिविल डिफेंस निदेशालय को सौंपा गया है।
13 मई को आपदा प्रबंधन विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी संतोष कुमार मॉल और महानिदेशक डॉ. परेश सक्सेना की अध्यक्षता में टेबल टॉप एक्सरसाइज हुई, जिसमें 6 प्रमुख बिंदुओं की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य:
सिर्फ बिहार नहीं, पूरा भारत तैयार हो रहा है,
यह मॉकड्रिल केवल बिहार तक सीमित नहीं है।

देश के 244 श्रेणीबद्ध सिविल डिफेंस जिलों में यह अभ्यास हो रहा है उन जिलों में जहाँ सैन्य ठिकाने, परमाणु संयंत्र या रिफाइनरियाँ हैं।
7 मई को दिल्ली के NDMC क्षेत्र इंडिया गेट, कनॉट प्लेस, लुटियंस दिल्ली में 15 मिनट का ब्लैकआउट हुआ।
मुंबई, नवी मुंबई, सूरत, बेंगलुरु और कई अन्य शहरों ने भी इसमें भाग लिया।
बेगूसराय ने 7 मई की पहली ड्रिल में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था, जिसकी सराहना ड्रिल की ब्रीफिंग में अलग से की गई।
यह बिहार के नागरिकों की जागरूकता और प्रशासन की सक्रियता का प्रमाण है।

पहलगाम की चीख ने भारत को जगाया ऑपरेशन सिंदूर ने जवाब दिया और अब यह मॉकड्रिल हर नागरिक को उस जिम्मेदारी की याद दिलाती है जो उसका भी है।

डर नहीं, दायित्व बोध,
राज्य सरकार का कहना है कि यह 'कोई खतरे की स्थिति नहीं है' और तकनीकी रूप से वे सही हैं।
लेकिन सच्चाई यह भी है कि यह मॉकड्रिल एक ऐसे समय में हो रही है जब भारत-पाकिस्तान के संबंध अपने सबसे तनावपूर्ण दौर में हैं।

जब पहलगाम का खून अभी सूखा नहीं है,
जब ऑपरेशन सिंदूर की गूँज अभी बाकी है तब यह 'अभ्यास' कोई सामान्य रूटीन ड्रिल नहीं है।
यह अभ्यास हमें याद दिलाता है कि नागरिक सुरक्षा सिर्फ सरकार और सेना का काम नहीं है। हर घर, हर दुकान, हर ऑफिस की बत्ती बुझाना यह सामूहिक जिम्मेदारी है।
जो देश आपदा के समय एकजुट होकर अँधेरे में कदम उठाना जानता है, वही देश युद्ध के मैदान में भी अविचल रहता है।

बिहार के नागरिकों से अपील है घबराएं नहीं, सहयोग करें। यह मॉकड्रिल डर की नहीं, दायित्व की परीक्षा है।

ज़मीनी हकीकत: प्रशासन के सामने चुनौतियाँ
हालांकि मॉकड्रिल का उद्देश्य स्पष्ट है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ सवाल ज़रूर उठते हैं:

क्या आम नागरिकों तक पर्याप्त जानकारी पहुंची?
जो घर सोशल मीडिया से दूर हैं, क्या उन्हें पता है?
रात के समय 15 मिनट के ब्लैकआउट में सड़क दुर्घटनाओं का ख़तरा क्या यातायात पुलिस पर्याप्त संख्या में तैनात रहेगी?

अस्पताल, ICU, डायलिसिस सेंटर जैसी जीवन-रक्षक सेवाएं क्या इन्हें पर्याप्त जनरेटर बैकअप सुनिश्चित किया गया है?

बुजुर्गों और बच्चों को अकेले डर न लगे इसके लिए सामुदायिक जागरूकता की जिम्मेदारी कौन लेगा?

समापन: रोशनी बुझाना भी एक देशसेवा है
जब 7 मई को पूरे बिहार में बत्तियाँ बुझीं थीं, तो लोग घरों से निकले और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए।
यह सहज देशभक्ति थी किसी आदेश की नहीं, दिल की। आज एक बार फिर वह मौका है।

शाम 7 बजे, जब सायरन बोले बत्ती बुझाइए, शांत रहिए और याद रखिए: इस 15 मिनट के अँधेरे में भारत अपनी ताकत का अभ्यास कर रहा है। यही वह ताकत है जो किसी भी दुश्मन को जवाब देने में सक्षम है।
सतर्क नागरिक ही सुरक्षित राष्ट्र की नींव है।

आज शाम 7 बजे बिहार के 6 जिलों में अँधेरा छाएगा!
पटना | पूर्णिया | बेगूसराय | कटिहार | किशनगंज | अरारिया

शाम 7:00 से 7:15 बजे तक 15 मिनट का पूर्ण ब्लैकआउट!
सायरन बजते ही बिजली काटी जाएगी। यह भारत सरकार के निर्देश पर सिविल डिफेंस मॉकड्रिल है।

क्या करें:
घर, दुकान, ऑफिस सब लाइटें बंद करें (इनवर्टर भी!)
वाहन रोकें, हेडलाइट बंद करें
घबराएं नहीं यह अभ्यास है, आपात स्थिति नहीं

पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' और अब यह मॉकड्रिल। देश तैयार है!
7 मई को बिहार ने शानदार ड्रिल की थी। आज फिर साबित करें हम तैयार है।

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