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बस्तर में नवाचार: सल्फी से बनेगा प्राकृतिक गुड़ और साबूदाना

कोंडागांव/जगदलपुर, छत्तीसगढ़।
बस्तर क्षेत्र में पारंपरिक संसाधनों के आधुनिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। अब तक केवल पारंपरिक पेय के रूप में पहचाने जाने वाले सल्फी (फिश टेल पाम) का उपयोग अब प्राकृतिक गुड़ (जैगरी) और साबूदाना निर्माण के लिए किया जाएगा।

वैज्ञानिक शोध एवं नवाचार के माध्यम से सल्फी के पेड़ से निकलने वाले मीठे रस को उबालकर उच्च गुणवत्ता वाला प्राकृतिक गुड़ तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही, पेड़ के तने के मध्य भाग (पिथ) से साबूदाना उत्पादन की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा वन आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलेगा।

यह नवाचार बस्तर के पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे भविष्य में यह क्षेत्र हरा सोना के रूप में उभर सकता है।

स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा इस दिशा में आवश्यक सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान किए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है, ताकि इस पहल को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके।

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