बनारस के स्वर्णकारों ने खोली झालमूड़ी की दुकानें, बढ़ती महंगाई और कारोबार में मंदी से बदला पेशा
इनसेप्शन डेली न्यूज़/ID News,
संदीप शास्त्री (ब्यूरो चीफ)
लखनऊ/वाराणसी
वाराणसी में पारंपरिक स्वर्णकारी व्यवसाय से जुड़े कई परिवार अब आर्थिक संकट और कारोबार में आई भारी गिरावट के चलते नया रोजगार अपनाने को मजबूर हो गए हैं। शहर के कई इलाकों में स्वर्णकार समुदाय के लोगों ने अब झालमूड़ी और फास्ट फूड की छोटी-छोटी दुकानें शुरू कर दी हैं।
बताया जा रहा है कि सोने-चांदी के बढ़ते दाम, ग्राहकों की घटती संख्या और ऑनलाइन बाजार के बढ़ते प्रभाव के कारण पारंपरिक आभूषण कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे छोटे कारीगरों और दुकानदारों की आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है।
स्वर्णकारों का कहना है कि परिवार चलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें वैकल्पिक रोजगार तलाशना पड़ा। कई लोगों ने सड़क किनारे झालमूड़ी, चाट और अन्य खाद्य सामग्री की दुकानें लगानी शुरू कर दी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बनारस की पहचान रहे पारंपरिक कारीगरों का इस तरह दूसरा पेशा अपनाना चिंताजनक है। वहीं, व्यापारियों ने सरकार से छोटे स्वर्णकारों के लिए राहत और सहायता की मांग की है, ताकि पारंपरिक कारोबार को फिर से मजबूती मिले।