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ग्रामीण विकास में चरित्र निर्माण और केकड़ा मानसिकता से मुक्ति जरूरी

मुरादाबाद: मोहम्मद आसिम, जो सिहाली खड्डर, डिलारी, मुरादाबाद के निवासी और All India Media Association (AIMA) के सदस्य हैं, ने ग्रामीण विकास में चरित्र निर्माण और 'केकड़ा मानसिकता' से मुक्त होने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी बाधा संसाधनों की कमी नहीं बल्कि समाज में व्याप्त दोहरी मानसिकता है, जो प्रगति में रोड़ा बनती है। उन्होंने 'सोच बदलो, देश बदलेगा' को एक वैचारिक क्रांति बताया और चरित्र को समाज की सार्थक दिशा देने वाला बताया।

आसिम ने बताया कि 'केकड़ा मानसिकता' के कारण जब कोई व्यक्ति प्रगति की ओर बढ़ता है, तो समाज के अन्य लोग उसे नीचे खींचने लगते हैं, जिससे समग्र विकास बाधित होता है। उन्होंने लालच की तुलना कार्य-कौशल की गरिमा से करते हुए कहा कि असली खुशी और मानसिक सृजन तभी संभव है जब काम में पारदर्शिता हो। एक मीडियाकर्मी के रूप में उनका लक्ष्य गलत विचारों को समाप्त कर वैचारिक पारदर्शिता लाना है, जिससे देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहतर हो सके। अंत में उन्होंने कहा कि जब हर व्यक्ति अपने चरित्र की शुद्धि करेगा तभी समाज और देश महान बनेगा।

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