"दिल्ली पुलिस का नारकोटिक्स इंस्पेक्टर CBI के शिकंजे में: 60 हजार सैलरी, 100 करोड़ की संपत्ति का आरोप"
"दिल्ली पुलिस का नारकोटिक्स इंस्पेक्टर CBI के शिकंजे में: 60 हजार सैलरी, 100 करोड़ की संपत्ति का आरोप"
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के नारकोटिक्स सेल में तैनात इंस्पेक्टर सुभाष यादव को CBI ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि करीब 60 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले इंस्पेक्टर के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति मिली है।
CBI की कार्रवाई के बाद उठे सवाल
CBI सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई है। इंस्पेक्टर सुभाष यादव पर नाइजीरियन ड्रग्स कार्टेल से साठगांठ कर करोड़ों की कमाई करने का आरोप है। जांच एजेंसी अब संपत्ति, बैंक खातों, बेनामी निवेश और लॉकरों की जांच कर रही है।
सिस्टम पर सवाल
इस गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि एक इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी इतना बड़ा नेटवर्क अकेले कैसे चला सकता है? सोशल मीडिया और जानकारों का कहना है कि बिना राजनीतिक-अफसरी संरक्षण के किसी अधिकारी का सालों तक एक ही पोस्टिंग पर जमे रहना और इतनी संपत्ति बनाना संभव नहीं है।
चर्चा है कि दिल्ली पुलिस जैसी व्यवस्था में जहां सरकारें, IAS और IPS अफसर बदलते रहते हैं, वहां कई साल तक एक ही कुर्सी पर बने रहना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद
जानकारों का मानना है कि अगर ईमानदारी से जांच हुई तो सिर्फ एक इंस्पेक्टर नहीं, बल्कि कई बड़े नाम, बंगले, फार्महाउस और बेनामी संपत्तियां भी सामने आ सकती हैं। अक्सर ऐसे मामलों में "छोटी मछली" पकड़कर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है, जबकि बड़े चेहरे बच निकलते हैं।
ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई पर सवाल
आरोप है कि जिनके कंधों पर दिल्ली को नशे से बचाने की जिम्मेदारी थी, वही कथित तौर पर नशे के कारोबार से फायदा उठा रहे थे। इससे नशा-मुक्ति अभियान की साख पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल CBI ने आरोपी इंस्पेक्टर को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में ऊपर तक की कड़ियां जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
नोट: यह खबर CBI की कार्रवाई और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आरोपों पर आधारित है। मामला जांच के अधीन है और कोर्ट में आरोप साबित होने तक सभी आरोपी निर्दोष माने जाएंगे।
अनिल भार्गव की कलम से