सोचो! बहुत कम पर करो ज्यादा पर करना सकारात्मक ही-- पंडित रामकृष्ण शर्मा
चंडीगढ़ बुधवार 13 मई 2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा रक्षत शर्मा---- जरूरी नहीं ज्ञान देने वाले की उम्र पढ़ाई लिखाई तुर्जबा ज्यादा हो, अक्सर छोटी उम्र वाला भी अनेकों बार बड़ी-बड़ी समस्याएं हल कर देता है। बस सोचने समझने की सकारात्मकता आत्मविश्वास का आधार होता है।
विद्यालय में अध्यापिका ने छात्रों से लिखने को कहा वे क्या बनना चाहते हैं? क्या नहीं?
प्रत्युत्तर में एक छोटे बच्चे की दृष्टि में *सीनियर सिटीजन* बनने की इतनी आनंदमय परिकल्पना सचमुच मुस्कुराहट ला देती है।
यह बच्चा कहता है
ना राष्ट्रपति बनना,
ना डॉक्टर,
ना वैज्ञानिक
इनमें से कुछ भी नहीं।
मेरी सबसे बड़ी आकांक्षा है कि मैं भविष्य में *सीनियर सिटीजन* बनूँयही सबसे मज़ेदार है।
क्योंकि मेरे *दादा जी*
सुबह देर से उठ सकते हैं,
दोपहर में झपकी ले सकते हैं,
टीवी देख सकते हैं और शाम को जल्दी सो सकते हैं।
कोई होमवर्क नहीं,
ना गर्मीसर्दी की छुट्टियों का होमवर्क,
ना ट्यूशन।
अगर कोई काम न हो तो पेड़ के नीचे बैठकर ठंडी हवा का मज़ा ले सकते हैं,
या पार्क में जाकर किसी के साथ शतरंज खेल सकते हैं।
कितनी भी देर वीडियो गेम खेलें, कोई परवाह नहीं करता।
सुबह कॉफी,
दोपहर में चाय,
शाम को दूध- मजा ही मज़ा।
बस में मुफ्त यात्रा,
और कोई अच्छा इंसान मिले तो वह सीट भी दे देता है।
हाईस्पीड ट्रेन में या फ़िल्म देखते समय आधा टिकट।
जो चाहो खाओ, कोई रोकने वाला नहीं क्योंकि दादा जी अकेले रहते है
जो मन चाहे वो करो
गाना गाओ, नाचो, चित्र बनाओ, पियानो बजाओ, ट्रम्पेट बजाओ, पहाड़ चढ़ो, ट्रैकिंग पर जाओ।
जेब में पैसा हो तो घूमने भी जा सकते हैं।
*सीनियर सिटीजन* बनना सच में धमाकेदार है!
प्रेरणा
*सीनियर सिटीजन* को खुद ही नहीं पता कि वे कितने सुखी हैं!!
सभी *सीनियर सिटीजन* को समर्पण।।