भाषा विभाग पंजाब "स्मार्ट और कुशल" बन गया है!
पटियाला मई :-ऐसा लगता है कि भाषा विभाग अब बहुत स्मार्ट और कुशल हो गया है। यह जानकर खुशी होती है कि विभाग ने 'जन साहित्य' और 'पंजाबी दुनिया' पत्रिकाओं का प्रकाशन फिर से शुरू कर दिया है, जो लंबे समय से बंद थीं। विभाग द्वारा जारी एक प्रेस नोट में निदेशक जसवंत सिंह जफर ने कहा कि लंबे समय से ये पत्रिकाएं विभिन्न कारणों से प्रकाशित नहीं हो रही थीं, लेकिन अब ये पत्रिकाएं समय पर और नियमित रूप से छपने लगी हैं। उन्होंने कहा कि अतीत के अधिकांश लंबित अंक मुद्रित किए जा चुके हैं और विभाग तक पहुंच गए हैं जो जल्द ही पाठकों तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि पहले इन पत्रिकाओं को पंजाब सरकार के मुद्रण और लेखन विभाग द्वारा मुद्रित किया जाता था, विभागों के समन्वय या वित्तीय संसाधनों की कमी या अन्य कारणों से उनकी छपाई में देरी होती थी। अब भाषा विभाग ने उन्हें छापने का काम अपने हाथ में ले लिया है। यह सुनिश्चित करता है कि वे नियमित रूप से और समय पर प्रकाशित हों। उन्होंने बताया कि विभागीय पत्रिकाओं की सामग्री में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। परोपकारी हस्तियों पर विशेष मुद्दों की संख्या में वृद्धि की गई है। विभाग ने सेमिनारों, चर्चाओं और विभिन्न विषयों पर विशेष व्याख्यानों के दौरान पढ़े जाने वाले पर्चे के आधार पर पत्रिकाओं के विशेष अंक प्रकाशित करना भी शुरू कर दिया है। इससे छात्रों की गुणवत्ता और पहुंच में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रकाशित विशेष अंक में शहीद भगत सिंह, डॉ. जगतर और डॉ। हरभजन सिंह का विशेष उल्लेख किया जाता है। इन पत्रिकाओं के ज्ञानी गुरुमुख सिंह मुसाफिर और डॉ. गुरमैल कौर जोशी का विशेष अंक भी पाठकों के हाथों में होगा। इस पत्रिका के संपादक डॉ. संतोख सिंह सुखी ने कहा कि 'जन साहित्य' पत्रिका रचनात्मक साहित्य से संबंधित कार्यों को कवर करती है और 'पंजाबी दुनिया' पत्रिका विभिन्न विषयों और व्यक्तित्वों पर शोध लेख प्रकाशित करती है। उन्होंने लेखकों और शोधकर्ताओं से अपील की कि वे अपने अधिक से अधिक लेखन और शोध पत्र इन पत्रिकाओं में भेजें।