नियमों को ताक पर रखकर 'ग्रेटर आगरा' का शिलान्यास, अवैध कोल्ड स्टोरों पर भी मेहरबान प्रशासन
नियमों को ताक पर रखकर 'ग्रेटर आगरा' का शिलान्यास, अवैध कोल्ड स्टोरों पर भी मेहरबान प्रशासन
RTI कार्यकर्ता मनीष चौहान ने खोला मोर्चा; मंडलायुक्त से की अवैध इकाइयों को सील करने की मांग
आगरा। ताजनगरी में विकास के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक तरफ जहां 5,142 करोड़ के 'ग्रेटर आगरा' प्रोजेक्ट को बिना प्रदूषण विभाग की NOC के शुरू कर दिया गया, वहीं क्षेत्रीय प्रशासन अवैध रूप से चल रहे कोल्ड स्टोरेज पर भी मौन साधे हुए है। RTI कार्यकर्ता और समाजसेवी मनीष चौहान ने इस 'दोहरे मापदंड' के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है।
अवैध निर्माण और प्रदूषण का गढ़ बने कोल्ड स्टोरेज
मनीष चौहान ने साक्ष्यों के साथ मंडलायुक्त को पत्र लिखकर बताया कि मौजा पोइया तहसील एत्मादपुर आगरा स्थित 'शिवांग' और 'श्री' शीत गृह बिना स्वीकृत मानचित्र (ADA) के संचालित हो रहे हैं। ADA ने खुद स्वीकार किया है कि इन इकाइयों के पास वैध मानचित्र नहीं है, फिर भी धारा-28 के तहत सीलिंग की कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरोप है कि इन संचालकों ने निजी भूमि पर अवैध कब्जा कर शौचालय और सीवर गड्ढे बना दिए हैं, जिसका गंदा पानी रिहायशी इलाकों में रिस रहा है।
विभागीय साठगांठ की बू?
शिकायत में बड़ा सवाल उठाया गया है कि जब भवन का नक्शा ही स्वीकृत नहीं है, तो उद्यान विभाग, प्रदूषण बोर्ड और अग्निशमन विभाग ने इन्हें लाइसेंस कैसे जारी कर दिए? कमिश्नर आगरा मंडल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ADA उपाध्यक्ष को 10 दिन के भीतर जांच कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
अपराधिक इतिहास और प्रशासनिक ढिलाई
पुलिस कमिश्नरेट आगरा से मिली जानकारी के अनुसार, इन इकाइयों से जुड़े कुछ व्यक्तियों का पूर्व में अपराधिक इतिहास भी रहा है, जिसमें धोखाधड़ी और मारपीट जैसे संगीन मामले शामिल हैं। इसके बावजूद, अधिकारियों की चुप्पी भ्रष्टाचार और 'परोक्ष संरक्षण' की ओर इशारा करती है।
"जब आम आदमी के छोटे से निर्माण पर बुलडोजर चल सकता है, तो बिना एनओसी और नक्शे के चल रहे इन बड़े प्रोजेक्ट्स और अवैध कोल्ड स्टोरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? हम इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएंगे।"
मनीष चौहान, RTI कार्यकर्ता एवं समाजसेवी