*झुग्गी झोपड़ी में पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों एवं उनके परिवार के साथ जन्मदिन मना कर खुशियां बांटना सराहनीय कार्य एवं मानवीय संवेदना हैं *
*झुग्गी झोपड़ी में पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों एवं उनके परिवार के साथ जन्मदिन मना कर खुशियां बांटना सराहनीय कार्य एवं मानवीय संवेदना हैं *
बदनावर गरीब बस्ती या झुग्गी झोपड़ी में जाकर जरूरतमंद बच्चों के साथ जन्मदिन मनाना उनकी खुशियों में शामिल होना समाज सेवा और खुशियां बांटने का एक बेहतर मानवीय और अनूठा तरीका है आजकल बहुत से युवा वर्ग सामाजिक संगठन अपनी खुशियां मंहगे होटल या पार्टी आज सीमित न रहकर झुग्गी झोपड़ी में पहुंचकर जरूरतमंद बच्चों एवं उनके परिवार के साथ जन्मदिन मना कर खुशियां बांटते हैं इस तरह के नेक कार्य करते हैं नगर की सामाजिक कार्यकर्ता पारुल चौहान द्वारा सेवार्थ सेतु फाऊंडेशन के द्वारा नगर में सामाजिक कार्य कर रही है इस फाउंडेशन में कई युवा वर्ग जुड़कर अपना जन्मदिन जरूरतमंद बच्चों में जाकर मना रहे हैं एवं समय-समय पर उन्हें सामग्री के रूप में कंबल कपड़े साड़ी कापियां पेन स्वेटर आदि का वितरण करते हैं इसी के अंतर्गत सेवार्थ सेतु फाऊंडेशन की सदस्य प्रियांशी सुधीर चौहान ने अपना जन्मदिन जरूरतमंद बस्ती में पहुंचकर छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर केक काटकर मनाया उन्हें अपने हाथों से केक खिलाया मिठाई बिस्कुट समोसे खिलाए बच्चे बहुत खुश होकर नाचने ताली बजाने लगे पारुल चौहान कहा की हमें उन परिवार एवं लोगों के पास पहुंचना चाहिए जो हमारे पास पहुंच नहीं पाते हैं एवं आने में संकोच करते हैं हमें सेवा के साथ-साथ समरसता के माध्यम से परीवार को हमसे जुडने का माध्यम बनता इस अवसर पर अश्विन पूर्वा संस्कृति उपस्थित रहे