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राष्ट्रीय एकता और अंतरधार्मिक सौहार्द समय की अहम आवश्यकता: मौलाना हकीमुद्दीन कासमी सद्गुरु श्री माधवप्रियदासजी स्वामी से मुलाकात में देश की साझा विरास

राष्ट्रीय एकता और अंतरधार्मिक सौहार्द समय की अहम आवश्यकता: मौलाना हकीमुद्दीन कासमी
सद्गुरु श्री माधवप्रियदासजी स्वामी से मुलाकात में देश की साझा विरासत और मूल्यों को बढ़ावा देने पर जोर

नई दिल्ली/अहमदाबाद, 13 मई 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने आज गांधीनगर, अहमदाबाद में सद्गुरु श्री माधवप्रियदासजी स्वामी से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रीय एकता, अंतरधार्मिक सौहार्द, नैतिक मूल्यों तथा भारत की साझा संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मुलाकात के दौरान सद्गुरु श्री माधवप्रियदासजी स्वामी ने गर्मजोशी के साथ मौलाना हकीमुद्दीन कासमी का स्वागत किया। मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने इस अवसर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के एकता, आपसी सौहार्द और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के संदेश पर प्रकाश डाला। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, धार्मिक सहिष्णुता और विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सम्मान में निहित है।

मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश को नफरत, विभाजन और कट्टरता से ऊपर उठकर प्रेम, भाईचारे और इंसानी हमदर्दी के संदेश को फैलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वह नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों, एकता और राष्ट्रीय कर्तव्यबोध की भावना को मजबूत करे।

उल्लेखनीय है कि स्वामीनारायण गुरुकुल विश्वविद्या प्रतिष्ठानम् एक प्रतिष्ठित शैक्षिक एवं सामाजिक संस्था है, जिसके अध्यक्ष एवं प्रेरणास्रोत सद्गुरु श्री माधवप्रियदासजी स्वामी हैं।

इस अवसर पर जमीयत उलेमा गुजरात के महासचिव प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी, सचिव असलम भाई कुरैशी, अनीस भाई कुरैशी, मौलाना मोहम्मद साहब, मौलाना शोएब साहब तथा जुबैर भाई भी उपस्थित थे।

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