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"गोमिया के 'अजेय योद्धा' और खोरठा माटी के लाल माधव बाबू का महाप्रयाण"

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

झारखंड की राजनीति का एक चमकता सितारा आज अस्त हो गया।
गोमिया विधानसभा क्षेत्र के पर्याय माने जाने वाले पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे।
उनके निधन से न केवल गोमिया, बल्कि पूरे झारखंड की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना नामुमकिन है।

माटी से जुड़ाव और खोरठा की मिठास
माधव लाल सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनका अपनी जड़ों से जुड़ाव था।
विधायक और मंत्री जैसे ऊंचे पदों पर रहने के बावजूद, उन्होंने कभी अपनी सादगी नहीं छोड़ी।
वे 'खोरठा' भाषा के प्रबल पक्षधर थे और हमेशा जनता से उनकी अपनी भाषा में संवाद करना पसंद करते थे।
यही कारण था कि गोमिया का हर घर उन्हें अपना अभिभावक मानता था।
"माधव बाबू" का संबोधन मात्र एक नाम नहीं, बल्कि हजारों लोगों के भरोसे का प्रतीक था।

एक गौरवशाली राजनीतिक सफर,
माधव लाल सिंह का राजनीतिक करियर संघर्ष और सफलता की मिसाल रहा।
उन्होंने गोमिया विधानसभा का चार बार (1985, 1990, 2000 और 2009) प्रतिनिधित्व किया।

निर्दलीय शक्ति:
उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत निर्दलीय के रूप में की और स्थापित राजनीतिक दलों को चुनौती देते हुए जीत हासिल की। यह उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता का प्रमाण था।

प्रशासनिक अनुभव:
सन 2000 में वे एकीकृत बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और झारखंड राज्य गठन के बाद भी क्षेत्र के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।

ईमानदारी और सादगी की मिसाल,
आज के दौर में जहाँ राजनीति चमक-धमक और सुरक्षा घेरों तक सीमित हो गई है, माधव बाबू एक अपवाद थे।
मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने कभी सुरक्षा गार्ड (बॉडीगार्ड) नहीं रखा। वे बेधड़क जनता के बीच जाते थे और उनकी समस्याओं को सुनते थे।
उनकी ईमानदारी और जनता के प्रति समर्पण ही था कि वे पांच दशकों तक राजनीति के केंद्र में बने रहे।

गोमिया का 'लाल' हुआ विदा,
रांची के अस्पताल में आज सुबह 9:40 बजे जब उनके निधन की खबर आई, तो पूरे गोमिया क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
लोग अपने उस नेता को याद कर रहे हैं जिसने गोमिया की आवाज को विधानसभा में मुखर किया।

निष्कर्ष:
माधव लाल सिंह का जाना झारखंड के लिए एक युग का अंत है। वे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया।
खोरठा माटी का यह लाल भले ही शारीरिक रूप से विदा हो गया हो, लेकिन गोमिया की गलियों और वहां के लोगों के दिलों में माधव बाबू की स्मृतियां हमेशा जीवंत रहेंगी।
शत-शत नमन। विनम्र श्रद्धांज

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