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शिक्षा का बाज़ार और कोचिंग संस्थानों की आलोचना

भारत: आज के दौर में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET और JEE की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों ने छात्रों को केवल 'रोल नंबर' बनाकर रख दिया है। बड़े कोचिंग संस्थान टॉपर्स की तस्वीरें छापकर अपनी प्रामाणिकता साबित करते हैं, लेकिन असफलता का दोष छात्र पर डाल दिया जाता है। भारी फीस के बावजूद सुरक्षा, मानसिक परामर्श और व्यक्तिगत मार्गदर्शन का अभाव है, और 'गारंटीड सिलेक्शन' के वादे केवल कागजी साबित होते हैं।

मध्यमवर्गीय अभिभावक कोटा, सीकर, अहमदाबाद जैसे शहरों में अपने बच्चों को भेजते समय अपनी जमा पूंजी और उम्मीदें लगाते हैं। कई परिवार कर्ज लेकर फीस भरते हैं, जहां पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने से आर्थिक एवं भावनात्मक संकट उत्पन्न होता है। 15-16 वर्ष के बच्चे 14 घंटे तक पढ़ाई करते हैं, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है और वे अवसाद की ओर बढ़ते हैं। पेपर लीक माफिया और गैर-जिम्मेदार संस्थान देश की युवा शक्ति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, इसलिए पारदर्शिता और कड़े सरकारी नियमों की आवश्यकता है।

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