वृक्ष' जीवन का आधार
जीवन के आधार हैं पादप
वसुधा को वसुंधरा बनाते;
पंचभूत देवत्व भरा है इनमें
रस रंग गंध से धरा सजाते।
रस रंग गंध से धरा सजाते।।
चलो गिनें खेत घर बाड़ा में
किसने कितने वृक्ष लगाए हैं?
स्पंदित जीवित रखने धरती
किसने कितने हाथ बटाएं हैं?
किसने कितने हाथ बटाएं हैं?
पादप हरितिमा का धरा पर
जीव-जंतु से संबंध है गहरा;
आवाज उठाने वालों के प्रति
बना हुआ मानव क्यों बहरा?
बना हुआ मानव क्यों बहरा??
हरित लवक बनाते हैं भोजन
शाक से खाद्य श्रृंखला बनती;
सामिष-निरामिष भोजन पा
धरती जीवन स्पंदित करती।
धरती जीवन स्पंदित करती।।
जड़ मूल जाती धरती गहरी
लवण जल खींचती हैं ऊपर;
वाष्प उत्सर्जन करते हैं पत्ते
करते हैं संभव जीवन भू पर।
करते हैं संभव जीवन भू पर।।
बढ़ने न देते तापक्रम वायु की
सूर्य तापन से करते हैं अवरोध;
सुतीक्ष्ण बनातीं हैं दृष्टि हमारी
नीड़ आलंबन वट वृक्ष प्ररोह।
नील आलंबन वट वृक्ष प्ररोह।।
फूल फल बीज कंद मूल पत्ते
सभी बन जाते खाद्य अवयव;
विष ग्रहण कर प्राण वायु देते
पादप वृक्ष से जीवन है संभव।
पादप वृक्ष से जीवन है संभव।।
उपदेश पर हम करें आचरण
वृक्ष बचायें,वृक्ष लगाएं मानव;
एक मात्र जीवित ग्रह धरती है
बनें न धरती माता का दानव।
बनें न धरती माता का दानव।।