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हिंदी कविता:आशा

जब-जब जीवन की राहों में
अंधियारा गहरा छाता है,
जब हर सपना टूट-टूट कर
मन को बहुत रुलाता है,
तब कहीं दूर क्षितिज तले
एक दीपक जल जाता है,
वही दीप जीवन में आकर
आशा कहलाता है।

आशा वह पहली किरण है,
जो रातों को हर लेती है,
सूखे मन के वीराने में
फिर हरियाली भर देती है।
जब थककर इंसान गिर पड़े,
और राह कहीं खो जाए,
तब आशा ही हाथ पकड़कर
उसको मंज़िल तक ले जाए।

आशा चिड़ियों की चहकन में,
आशा बच्चों की हँसी में,
आशा माँ की आँखों में,
आशा खेतों की नमी में।
आशा मंदिर की घंटी है,
मस्जिद की मीठी अज़ान,
आशा गीता की वाणी है,
और कुरआन का सम्मान।

जब किसान सूखे खेतों में
मेहनत का बीज लगाता है,
तपती धरती की छाती पर
पसीने से जल बरसाता है,
तब उसके मन के भीतर
एक विश्वास मुस्काता है,
कि कल फिर से इस धरती पर
सोना लहलहाएगा।

जब सैनिक सीमा पर खड़ा
सर्द हवाओं को सहता है,
अपने घर-परिवार से दूर
हर मुश्किल हँसकर कहता है,
उसकी आँखों में भी देखो
एक सपना जगमगाता है,
देश सुरक्षित होगा अपना
यही भरोसा आता है।

आशा केवल शब्द नहीं,
जीवन का आधार है,
इसके बिना यह दुनिया
सूना-सा संसार है।

आशा टूटे मन को जोड़ती,
पत्थर में फूल खिलाती है,
सूखी नदियों के होठों पर
फिर से गीत सुनाती है।

जब-जब इंसान हार मानकर
बैठ कहीं रो जाता है,
आशा बनकर कोई तारा
चुपके से मुस्काता है।
कहता है
मत रुक, मत झुक,
अभी सफर बाकी है,
तेरे भीतर जिंदा अब भी
जीने की चिंगारी है।

आशा सूरज की गर्मी है,
आशा चंदा की शीतलता,
आशा प्रेम की भाषा है,
आशा मन की निर्मलता।
यह टूटे दिल की धड़कन है,
यह वीरों की पहचान,
आशा से ही जीवित रहता
हर मानव का सम्मान।

जिस दिन मन से आशा जाती,
जीवन सूना हो जाता है,
हँसता-गाता यह उपवन भी
पतझड़ जैसा हो जाता है।
इसलिए हर हाल में इंसां
उम्मीदों को जीवित रखे,
तूफ़ानों के बीच खड़ा हो
फिर भी सपनों का दीपक रखे।

चलो जलाएँ आशा के दीप
हर दिल के अंधियारे में,
चलो भरोसा बो दें फिर से
नफरत के बाज़ारे में।
क्योंकि आशा ही वह शक्ति है
जो मानव को महान करे,
गिरकर फिर उठने का साहस
हर कमजोर इंसान भरे।

आशा से ही दुनिया चलती,
आशा से हर प्राण,
आशा ही जीवन की धड़कन,
आशा ही भगवान।

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