गया के किसान की डिजिटल पहचान: अब सरकारी योजनाएँ एक क्लिक में,
लक्ष्य का 57% पूरा 1.45 लाख किसान अभी भी बाकी; 12 मई से मिशन मोड में नया अभियान; DM ने तेजी लाने के निर्देश दिए,
विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार
गया। बिहार के किसान की जिंदगी अब बदलने वाली है और इस बदलाव की शुरुआत हो रही है एक 11 अंकों की डिजिटल पहचान से, जिसे कहते हैं फार्मर आईडी।
जिस तरह आधार कार्ड ने हर नागरिक को एक डिजिटल पहचान दी, उसी तरह एग्रीस्टेक परियोजना के तहत देश के हर किसान को एक विशिष्ट फार्मर आईडी मिलेगी जो उसकी जमीन, फसल, और हर सरकारी योजना के लाभ को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ देगी।
गया में इस महाअभियान की रफ्तार तेज करने के लिए हरिदास सेमिनरी स्कूल के सांस्कृतिक भवन में एक विशेष प्रशिक्षण-सह-समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिला पदाधिकारी शंशाक शुभंकर ने कार्य में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए और उत्कृष्ट कार्य करने वाले पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया।
गया की अब तक की उपलब्धि आधा सफर पूरा, आधा बाकी,
गया जिले में फार्मर रजिस्ट्री का कुल लक्ष्य 3,39,001 किसान निर्धारित है।
जनवरी और फरवरी 2026 में आयोजित तीन शिविरों में अब तक 1,93,888 किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है यानी लक्ष्य का लगभग 57.2 प्रतिशत।
तीन शिविरों का विवरण इस प्रकार रहा:
प्रथम शिविर (6 जनवरी से 11 जनवरी 2026): 44,196 किसान पंजीकृत,
द्वितीय शिविर (18 जनवरी से 21 जनवरी 2026): 29,293 किसान पंजीकृत,
तृतीय शिविर (2 फरवरी से 11 फरवरी 2026): 36,335 किसान पंजीकृत,
लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है अभी भी 1,45,113 किसान फार्मर रजिस्ट्री से वंचित हैं।
यानी गया जिले का लगभग 43 प्रतिशत किसान अभी भी इस डिजिटल क्रांति से बाहर है।
इमामगंज और टिकारी जिले के दो सितारे,
उपलब्धि की दृष्टि से गया जिले में दो प्रखंड सबसे अलग चमके।
इमामगंज प्रखंड ने प्रतिशत के आधार पर अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 118 प्रतिशत पंजीकरण कर यह प्रखंड पूरे जिले में प्रथम स्थान पर रहा।
यानी जितने किसानों का लक्ष्य था, उससे अधिक किसानों को डिजिटल पहचान दिलाई गई।
टिकारी प्रखंड ने संख्या के आधार पर सर्वाधिक 13,325 किसानों का पंजीकरण कर जिले में पहला स्थान हासिल किया।
12 मई से मिशन मोड: अब 30 जून तक का लक्ष्य,
जो किसान अब तक फार्मर रजिस्ट्री से नहीं जुड़ पाए हैं, उनके लिए 12 मई से 30 जून तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
इन कैंपों में मुख्य रूप से PM किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की फार्मर आईडी बनाई जाएगी।
गया जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह अभियान अब मिशन मोड में चलाया जाएगा। प्रखंड स्तर के सभी पदाधिकारियों BDO, CO, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, हल्का कर्मचारी और कृषि समन्वयक को शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है।
पंजीकरण कराने के लिए किसानों को आधार कार्ड, भूमि संबंधित दस्तावेज (LPC/रसीद) और मोबाइल नंबर साथ लाना अनिवार्य है।
पंजीकरण की प्रक्रिया में e-KYC और भूमि संबंधी दावों का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा।
उत्कृष्ट अधिकारियों को सम्मान,
समारोह में गया जिले में फार्मर रजिस्ट्री का उत्कृष्ट कार्य करने के लिए निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित किया गया:
पदाधिकारी स्तर
: श्री परितोष कुमार (अपर समाहर्ता, राजस्व), श्री संजीव कुमार (जिला कृषि पदाधिकारी, गया), श्री आनंद प्रकाश (वरीय उप समाहर्ता, बेलागंज), अनुमंडल पदाधिकारी टिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, तथा प्रखंड कृषि पदाधिकारी टिकारी एवं इमामगंज।
जमीनी कर्मी: राजस्व कर्मचारी, हल्का कर्मचारी, कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार को भी सम्मानित किया गया जो वास्तव में इस अभियान की रीढ़ हैं।
फार्मर आईडी से क्या बदलेगा किसान की जिंदगी में?
यह केवल एक आईडी नहीं है यह किसान की डिजिटल ताकत है। इसके जरिए किसानों को PM-KISAN, फसल बीमा, MSP खरीद, कृषि ऋण और आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगा।
फार्मर आईडी होने पर KCC लोन की स्वीकृति में केवल एक मिनट का समय लगेगा।
पुराने सिस्टम में किसानों को शपथ पत्र, खसरा-खतौनी और पहचान पत्र लेकर बैंकों की चौखट पर खड़ा होना पड़ता था लेकिन अब डिजिटल फार्मर आईडी के जरिए किसान की पहचान तुरंत हो जाएगी।
PM किसान सम्मान निधि की आने वाली किस्तों का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी प्रोफाइल फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर अपडेट होगी। यदि यूनिक आईडी PM-KISAN पोर्टल से लिंक नहीं है, तो किस्त 'Stop by State' या 'Pending for e-KYC' जैसी समस्याओं में फंस सकती है।
राष्ट्रीय परिदृश्य:
बिहार आगे,
19 मार्च 2026 तक देशभर में 9.20 करोड़ से अधिक किसान आईडी जारी की जा चुकी हैं।
इनमें बिहार के 47.63 लाख किसान भी शामिल हैं। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर ने 24 मार्च को लोकसभा में साझा की।
एग्रीस्टेक के तहत सरकार ने केवल भूमिधारक ही नहीं, बल्कि किरायेदार और बटाईदार किसानों को भी शामिल करने का प्रावधान किया है, जिससे अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
गया जिले का 57.2 प्रतिशत पंजीकरण यह उपलब्धि प्रशंसनीय है, लेकिन अधूरी है।
1,45,113 किसान अभी भी इस डिजिटल जाल से बाहर हैं। इनमें से अधिकांश वे होंगे जो दूरदराज के गाँवों में हैं, जिनके पास जागरूकता की कमी है, या जो तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहे हैं।
सवाल सिर्फ पंजीकरण संख्या का नहीं है सवाल यह है कि जो किसान रजिस्ट्री से छूट जाएगा, क्या वह PM-KISAN की किस्त से भी छूट जाएगा?
क्या उसे KCC लोन मिलेगा?
क्या आपदा में मुआवजा मिलेगा?
इसीलिए यह मिशन मोड जरूरी है।
और इसीलिए 30 जून की डेडलाइन से पहले गया का हर किसान फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ना चाहिए।
"जो किसान डिजिटल नहीं, वह सरकारी योजनाओं की दौड़ में पीछे रह जाएगा।
12 मई से 30 जून यही वह खिड़की है जो गया के 1.45 लाख किसानों के लिए खुली है।"
किसानों से अपील: अपना आधार कार्ड, LPC/रसीद और मोबाइल नंबर लेकर अपने नजदीकी पंचायत शिविर में जाएँ। देर न करें योजनाएँ आपका इंतजार कर रही हैं।