126 वर्षों की अद्भुत गाथा-तीन जन्मों की स्मृतियाँ, तीन परिवारों का रिश्ता और एक माँ का अमर ममत्व
डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल
मानव जीवन, आत्मा और पुनर्जन्म को लेकर सदियों से बहस होती रही है, लेकिन भोपाल की 79 वर्षीय स्वर्णलता तिवारी की कहानी इन सभी चर्चाओं को एक नया आयाम देती है। यह केवल पुनर्जन्म की कथा नहीं, बल्कि एक ऐसी भावनात्मक यात्रा है जिसमें एक माँ का प्रेम तीन जन्मों के बाद भी जीवित दिखाई देता है।
स्वर्णलता तिवारी को अपने वर्तमान जीवन के साथ-साथ पिछले तीन जन्मों की स्मृतियाँ आज भी स्पष्ट रूप से याद हैं। यही कारण है कि देश-विदेश के वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिकों और पैरासाइकोलॉजिस्टों के लिए उनका जीवन एक शोध का विषय बना हुआ है।
बताया जाता है कि स्वर्णलता को अपने पूर्व जन्मों के परिवार, रिश्तेदार, घर, घटनाएँ और बच्चों तक की जानकारी आज भी याद है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वे आज भी उन परिवारों के संपर्क में हैं और उनके प्रति वही आत्मीयता और ममता रखती हैं।
पूर्व जन्मों से जुड़े रिश्तेदारों के नाम-समाचारों और उपलब्ध विवरणों के अनुसार, स्वर्णलता तिवारी के पूर्व जन्म से जुड़े कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार बताए जाते हैं
पूर्व जन्म के पति के रूप में राजाराम पाठक का उल्लेख किया गया है।
उनके पूर्व जन्म के पुत्र के रूप में रमेश पाठक का नाम सामने आया।
परिवार से जुड़े अन्य सदस्यों में डॉ. राहुल पांडे (सेवानिवृत्त सर्जन) का उल्लेख किया गया है, जो स्वयं इस संबंध को भावनात्मक रूप से स्वीकार करते हैं।
इसके अतिरिक्त, रेलवे इंजीनियर संजीव तिवारी ने भी स्वर्णलता के प्रति गहरे आत्मीय संबंध और आध्यात्मिक जुड़ाव की बात कही है।
पैरासाइकोलॉजिस्ट एवं पुनर्जन्म विशेषज्ञ डॉ. ज्योति गुप्ता ने भी इस पूरे प्रकरण का अध्ययन कर इसे अत्यंत रहस्यमयी और शोध योग्य बताया है।
126 वर्षों से चल रही स्मृतियों की कहानी-स्वर्णलता तिवारी का कथित पहला जन्म कटनी क्षेत्र में हुआ बताया जाता है। बाद में पुनर्जन्म के रूप में उनका जीवन आगे बढ़ा और वर्तमान जन्म में वे भोपाल में रह रही हैं। आश्चर्यजनक रूप से उन्हें अपने पुराने घर, परिवार और रिश्तों की अनेक बातें आज भी याद हैं।
उनके अनुसार, पूर्व जन्मों की स्मृतियाँ केवल घटनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भावनाएँ भी उतनी ही जीवंत हैं। वे अपने पिछले जन्मों के बच्चों को आज भी उसी ममता से याद करती हैं, जैसे कोई माँ अपने परिवार को करती है।
क्या आत्मा सचमुच अमर है? स्वर्णलता तिवारी की यह कहानी विज्ञान, अध्यात्म और मानव चेतना के बीच खड़े उस प्रश्न को फिर जीवित कर देती है, जिसका उत्तर आज भी पूरी तरह नहीं मिल पाया है। क्या वास्तव में आत्मा जन्म बदलती है? क्या रिश्ते केवल शरीर से नहीं, आत्मा से भी जुड़े होते हैं? और क्या एक माँ का प्रेम मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होता?
इन सवालों के बीच स्वर्णलता तिवारी आज केवल एक महिला नहीं, बल्कि पुनर्जन्म और मानवीय चेतना के रहस्य का जीवित अध्याय बन चुकी हैं।