"शब्दों का खयाली सिनेमा बनाम कर्म की हकीकत: ग्रामीण भारत का नया आईना"
(Yeh dikhawe aur asliyat ke antar ko dikhati hai
सिहाली खड्डर, डिलारी, मुरादाबाद : मोहम्मद आसिम ने ग्रामीण भारत के सामाजिक और नैतिक परिवेश पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण समाज आज वैचारिक संकट से जूझ रहा है जहां इंसान का चरित्र समाज को सार्थक बनाने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन लालच ने इसे कमजोर कर दिया है।
उन्होंने सकारात्मक सोच विकसित करने, काम की गरिमा को समझने और मीडिया की पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है। मोहम्मद आसिम ने उदाहरण देते हुए बताया कि बच्चों द्वारा स्थापित लघु उद्योग आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। साथ ही, मीडिया को सामाजिक दर्पण बनाकर सत्य को प्रदर्शित करने की आवश्यकता बताई। उनका निष्कर्ष है कि दोष के बजाय आत्म-बोध को अपनाकर ग्रामीण समाज को सार्थक बनाना होगा।