अपरा एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व और पूजा विधि
ज्येष्ठ मास में आने वाली पहली एकादशी का नाम अपरा एकादशी है। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का यह व्रत भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। 13 मई को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होने के कारण इस दिन व्रत रखा जाएगा और इसका पारण 14 मई को किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
अपरा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अपार है। इस दिन किया गया जप, तप, व्रत और दान अनंत गुना फल देने वाला माना जाता है। जो श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करता है, उसके पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है। यह व्रत ब्रह्महत्या, परनिंदा, असत्य भाषण जैसे दोषों से मुक्ति दिलाता है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। पूजा विधि में सुबह स्नान, घर की सफाई, भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा, मंत्र जाप और प्रसाद वितरण शामिल हैं।
इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और क्रोध, निंदा, असत्य भाषण से बचना आवश्यक है। दान का विशेष महत्व है, जिसमें जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अन्न और धन देना शुभ माना गया है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी दान के महत्व को रेखांकित किया है कि दान करने से धन में कमी नहीं आती यदि भगवान का आशीर्वाद साथ हो।