प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार पेट्रोल, डीजल और सोने की बचत की अपील की:-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार देशवासियों से पेट्रोल, डीजल और सोने के उपयोग में संयम बरतने तथा अनावश्यक खर्च से बचने की अपील की है। पिछले चौबीस घंटों के भीतर तेलंगाना और बाद में गुजरात में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ईंधन संरक्षण, आर्थिक अनुशासन और जिम्मेदार उपभोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना समय की बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पेट्रोल और डीजल का उपयोग सोच-समझकर करें तथा जहां संभव हो, ईंधन बचत के उपाय अपनाएं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छोटी-छोटी बचतें मिलकर देश की आर्थिक शक्ति को मजबूत बनाती हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सोने की बचत और घरेलू आर्थिक सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने लोगों को वित्तीय अनुशासन अपनाने, अनावश्यक खर्च से बचने तथा दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान देने की सलाह दी। उनका कहना था कि समझदारी से किया गया खर्च और बचत केवल परिवारों को ही मजबूत नहीं बनाते, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन संरक्षण पर बार-बार जोर दिए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री का संदेश केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक सतर्कता का संकेत भी है। सरकार लंबे समय से वैकल्पिक ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, जैव ईंधन और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील को जिम्मेदार उपभोग अभियान के रूप में भी देखा जा रहा है। सोने का उल्लेख भी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में शामिल है और भारी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अत्यधिक स्वर्ण आयात से विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए वित्तीय अनुशासन और संतुलित निवेश पर जोर देना सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि राष्ट्र की आर्थिक मजबूती केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी और जिम्मेदार व्यवहार से भी तय होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऊर्जा बचत, आर्थिक अनुशासन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। राजनीतिक और आर्थिक हलकों में प्रधानमंत्री के इस लगातार दोहराए गए संदेश को गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सतर्क है और जनता को पहले से तैयार रहने का संदेश दे रही है ताकि संभावित आर्थिक दबावों का प्रभाव कम किया जा सके।