वर्षों से बंद पड़ा सीएचसी का ऑपरेशन थिएटर, सीजर सुविधा ठप होने से गर्भवती महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें*
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मड़िहान। एक ओर सरकार सुरक्षित मातृत्व और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर मड़िहान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था उन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां प्रसव पीड़ा से तड़पती महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर करीब दो वर्षों से बंद पड़ा है और सीजर ऑपरेशन की सुविधा पूरी तरह ठप हो चुकी है। ऐसे में गंभीर प्रसूताओं को मजबूरन मंडलीय अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
कभी महिलाओं और नवजातों की किलकारियों से गूंजने वाला सीएचसी का ऑपरेशन थिएटर अब वीरान पड़ा है। अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को इलाज की उम्मीद के बजाय रेफरल की पर्ची थमा दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक बन चुकी है।
जानकारी के अनुसार सीजर विशेषज्ञ डॉक्टर शिल्पी केसरवानी और डॉक्टर हर्षिता श्रीवास्तव लंबे समय से अस्पताल से अनुपस्थित हैं। सूत्रों का कहना है कि अक्टूबर 2024 तक दोनों चिकित्सकों का वेतन जारी होता रहा, लेकिन नवंबर 2024 के बाद से उनकी उपस्थिति अस्पताल में नहीं देखी गई। बाद में मुख्य चिकित्साधिकारी स्तर से वेतन आहरण पर रोक लगा दी गई, लेकिन अब तक किसी नई महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। इससे पूरे क्षेत्र की महिलाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं के परिजन डॉक्टरों से मदद की आस लगाए रहते हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि सीजर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो परिवार चिंता में डूब जाता है। कोई एंबुलेंस के इंतजार में परेशान दिखता है, तो कोई निजी वाहन की व्यवस्था के लिए कर्ज मांगने को मजबूर हो जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंभीर हालत में प्रसूताओं को मंडलीय अस्पताल भेजने में काफी समय बर्बाद हो जाता है। दूरी, आर्थिक तंगी और इलाज में देरी कई बार मां और नवजात दोनों के लिए खतरा बन सकती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वैकल्पिक महिला चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी जाती, तो हजारों गरीब परिवारों को इस परेशानी से नहीं गुजरना पड़ता।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक अधीक्षक द्वारा कई बार उच्चाधिकारियों को डॉक्टरों की अनुपस्थिति और बंद पड़ी सेवाओं की जानकारी भेजी गई, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कागजी कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य सेवाएं लगातार प्रभावित होती रहीं।
क्षेत्रीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर अनुपस्थित चिकित्सकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए तथा सीएचसी मड़िहान में तत्काल महिला डॉक्टरों की तैनाती कर ऑपरेशन थिएटर को फिर से शुरू कराया जाए।
यह मामला अब केवल एक अस्पताल की अव्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और उनकी बेबसी की दर्दनाक तस्वीर बन चुका है। सवाल यह है कि आखिर कब तक गर्भवती महिलाओं को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए यूं ही भटकना पड़ेगा?