logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं पर नया बोझ? अब बिल में जुड़ सकता है स्ट्रीट लाइट सरचार्ज

उत्तराखंड में पहले से बढ़ती महंगाई और बिजली दरों के बीच आम उपभोक्ताओं को जल्द एक और आर्थिक झटका लग सकता है। राज्य के शहरी विकास विभाग ने नगर निकायों पर बढ़ते स्ट्रीट लाइट बिजली बिल के बकाये को देखते हुए एक नया प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत अब जनता से सीधे स्ट्रीट लाइट सरचार्ज वसूला जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव जल्द ही राज्य के मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश के सभी 108 नगर निकायों में लागू करने की तैयारी है।

देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी समेत कई जिलों के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों पर बिजली वितरण कंपनी UPCL का करोड़ों रुपये बकाया बताया जा रहा है। सीमित आय और आर्थिक दबाव के चलते कई निकाय नियमित रूप से स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं सार्वजनिक सुविधा से जुड़े होने के कारण यूपीसीएल इन लाइटों की बिजली आपूर्ति काटने की स्थिति में भी नहीं है।

कैसे वसूला जाएगा सरचार्ज?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हर बिजली उपभोक्ता के बिल में अलग से स्ट्रीट लाइट सरचार्ज जोड़ा जाएगा। उपभोक्ताओं से वसूली गई यह राशि यूपीसीएल के माध्यम से संबंधित नगर निकायों या शहरी विकास विभाग को हस्तांतरित की जाएगी, ताकि स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल और रखरखाव का खर्च निकाला जा सके।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रति उपभोक्ता कितना अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा और यह शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में समान होगा या नहीं।

पहले ही बढ़ चुकी हैं बिजली दरें:
गौरतलब है कि उत्तराखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरें पहले ही लागू हो चुकी हैं। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) और UPCL टैरिफ आदेश के तहत विभिन्न श्रेणियों में बिजली दरों और अतिरिक्त अधिभार से जुड़े आदेश जारी किए गए हैं।

ऐसे में यदि नया सरचार्ज लागू होता है, तो घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में और वृद्धि तय मानी जा रही है।

विपक्ष और जनता उठा सकते हैं सवाल:
इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निकायों की वित्तीय अक्षमता का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालना एक आसान प्रशासनिक समाधान तो हो सकता है, लेकिन इससे जनता में असंतोष बढ़ सकता है।

वहीं शहरी विकास विभाग का तर्क है कि स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सार्वजनिक सुविधा को चालू रखने और नगर निकायों के बढ़ते बकाये को नियंत्रित करने के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था जरूरी हो गई है।

अब निगाहें मुख्य सचिव स्तर पर होने वाले फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि इस प्रस्ताव की मंजूरी सीधे लाखों बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकती है।

22
13165 views

Comment