औरंगाबाद सहित कई जिलों में ऑनलाइन सट्टेबाजी का बढ़ता जाल:
औरंगाबाद सहित कई जिलों में ऑनलाइन सट्टेबाजी का बढ़ता जाल:
सट्टेबाजी बिगाड़ रहा युवायों का भविष्य
नन्द कुमार सिंह /ब्युरो चीफ,राष्ट्रीय प्रसार
औरंगाबाद /बिहार--- आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के दौरान औरंगाबाद सहित कई जिलों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है। स्थानीय युवा इस जाल में फंसकर आर्थिक रूप से बर्बाद हो रहे हैं, जबकि कई परिवार अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठे हैं।। सूत्रों के अनुसार, यह महज सट्टेबाजी नहीं बल्कि एक संगठित डिजिटल सिंडिकेट है, जो तकनीकी धोखाधड़ी के जरिए लोगों को लूट रहा है।।
11 स्पोर्ट, गो एक्सचेंज समेत कई अवैध ऐप सक्रिय
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, औरंगाबाद सहित कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में 11 स्पोर्ट, एचएन स्पोर्ट, गो एक्सचेंज और BSF365 जैसी अवैध वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए सट्टेबाजी का धंधा चलाया जा रहा है। इन साइटों का पूरा नियंत्रण स्थानीय बुकी और उनके आकाओं के हाथ में है। गिरोह का मुख्य केंद्र पड़ोसी जिले रोहतास में बताया जा रहा है, जहां से बारुण के एजेंटों को संचालन के निर्देश मिलते हैं।।
गिरोह की कार्यशैली काफी चालाक है
सरगना पहले PhonePe, Google Pay जैसी डिजिटल भुगतान ऐप्स के माध्यम से पैसे जमा करवाते हैं और बदले में यूजर को आईडी पर पॉइंट्स या कॉइन देते हैं। इसी वर्चुअल करेंसी से सट्टेबाजी शुरू होती है।
जीतते ही टेक्निकल ग्लिच या आईडी ब्लॉक
इस धंधे का सबसे बड़ा फ्रॉड यह है कि जीतने की कोई गुंजाइश नहीं रखी गई है। जैसे ही कोई खिलाड़ी लगातार दांव जीतने लगता है या उसकी रकम बढ़ने लगती है, पर्दे के पीछे बैठे ऑपरेटर सक्रिय हो जाते हैं। वे जानबूझकर साइट में टेक्निकल ग्लिच (तकनीकी खराबी) पैदा कर देते हैं या खिलाड़ी की आईडी को ब्लॉक कर देते हैं। नतीजतन, जीता हुआ सारा पैसा डूब जाता है और खिलाड़ी बिना कुछ कहे चुपचाप रह जाता है।।
रोहतास कनेक्शन और बढ़ता नेटवर्क
सूत्र बताते हैं कि यह सिंडिकेट औरंगाबाद तक सीमित नहीं है। इसका नेटवर्क रोहतास जिले तक फैला हुआ है। डिजिटल ट्रांजैक्शन और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के कारण यह गिरोह अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। जहां एक तरफ युवा कर्ज के दलदल में फंसकर परिवारों को आर्थिक संकट में डाल रहे हैं, वहीं सरगना आलीशान जीवन जी रहे हैं।।
झांसी छापेमारी के बाद औरंगाबाद में भी मांग
महज दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के झांसी में आईपीएल सट्टेबाजी के एक बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया, जिसमें करोड़ों रुपये के लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आए। इस घटना के बाद बारुण और औरंगाबाद के स्थानीय निवासियों, युवाओं और बुद्धिजीवियों ने औरंगाबाद पुलिस प्रशासन से मांग की है कि यहां भी विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाए और युवाओं को इस दलदल से बचाया जाए।।
साइबर सेल पर टिकी हैं उम्मीदें
पुलिस प्रशासन के समक्ष यह डिजिटल चुनौती है। चूंकि पूरा खेल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से चल रहा है, इसलिए औरंगाबाद पुलिस की साइबर सेल की भूमिका अहम हो गई है। जानकारों का कहना है कि इन सट्टेबाजों के बैंक खातों, यूपीआई आईडी और डिजिटल ट्रांजैक्शन की ट्रेल खंगालने से रोहतास और बारुण के कई सफेदपोश चेहरों का खुलासा हो सकता है।।
स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते इस संगठित सिंडिकेट पर नकेल नहीं कसी गई तो क्षेत्र में अपराध का नया और खतरनाक स्वरूप उभर सकता है।।
निष्कर्ष: क्रिकेट के प्रति जुनून को हथियार बनाकर युवाओं का शोषण करने वाले इस डिजिटल माफिया पर तुरंत अंकुश लगाने की जरूरत है। आमजन से भी अपील है कि ऐसे अवैध ऐप्स से दूर रहें और किसी भी आर्थिक नुकसान की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।।