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25 हजार करोड़ का प्रीपेड मीटर प्रोजेक्ट डूबा

"यूपी में 25 हजार करोड़ का स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रोजेक्ट संकट में: सरकार की रोक से बिजली कंपनियों में हड़कंप, उपभोक्ताओं में गुस्सा"

मेरठ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना पर लगी रोक ने बिजली विभाग और ऊर्जा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 25 हजार करोड़ रुपये के इस बड़े प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं कि अगर सरकार पूरी तरह प्रीपेड मॉडल से पीछे हटती है तो इतनी बड़ी राशि आखिर एडजस्ट कैसे होगी?

ऊर्जा मंत्री की रोक के बाद बैकफुट पर विभाग
जनविरोध और लगातार मिल रही शिकायतों के दबाव में सरकार ने स्मार्ट मीटर योजना पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद कंपनियों के अनुबंध और भुगतान पर भी सवाल उठने लगे हैं। विभागीय गलियारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

क्या था प्रोजेक्ट का मकसद
स्मार्ट मीटर योजना को बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, लाइन लॉस कम करने और बिलिंग सिस्टम को डिजिटल बनाने का बड़ा कदम बताया गया था। इसके तहत उपभोक्ताओं के घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने थे।

जमीनी हकीकत उलट
लेकिन जमीनी स्तर पर हालात उलट दिखाई दे रहे हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई लोगों का आरोप है कि रिकॉर्ड में पोस्टपेड मीटर दर्ज होने के बावजूद कुछ दिनों बाद मीटर प्रीपेड मोड में दिखाई देने लगता है।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा नाराजगी
कंकरखेड़ा, शास्त्री नगर और जागृति विहार समेत कई इलाकों में उपभोक्ताओं ने बिना स्पष्ट सहमति प्रीपेड सिस्टम लागू किए जाने पर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि उन्हें न तो इसकी पूरी जानकारी दी गई और न ही मोड बदलने की पारदर्शी सूचना मिली।

रिमोट से बदल रहा मोड, बढ़ा विवाद
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसका मोड रिमोट सिस्टम से बदला जा सकता है, लेकिन यही सुविधा अब विवाद की वजह बन गई है। उपभोक्ताओं को डर है कि भविष्य में पूरी व्यवस्था जबरन प्रीपेड मॉडल में बदल सकती है।

अब आगे क्या
25 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर रोक के बाद अब सबसे बड़ा सवाल कंपनियों के अनुबंध और खर्च हुई राशि का है। अगर सरकार प्रीपेड मॉडल से पूरी तरह पीछे हटती है तो इतनी बड़ी रकम का क्या होगा, इस पर विभाग में मंथन चल रहा है।

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