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" एक युग की सादगी का अंत: बागी कुमार वर्मा को अंतिम प्रणाम "

"

जो पिता की विरासत से बड़े हो सकते थे, उन्होंने उसे और ऊँचा उठाया बिहार के पूर्व मंत्री व समाजवाद के सच्चे वारिस बागी कुमार वर्मा का दिल्ली में निधन,

विजय कुमार , वरिष्ठ पत्रकार

गया। मगध की धरती आज शोक में डूबी है।
बिहार की राजनीति में समाजवाद की मशाल जलाने वाले लोक रत्न, प्रखर समाजवादी चिंतक और जुझारू स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय उपेंद्र नाथ वर्मा के द्वितीय सुपुत्र बागी कुमार वर्मा का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया।
उनके जाने की खबर फैलते ही गया जिले समेत पूरे मगध क्षेत्र शेरघाटी, बांके बाजार, जहानाबाद में शोक की गहरी लहर दौड़ गई।

वे केवल एक पूर्व मंत्री के पुत्र नहीं थे। वे स्वयं बिहार सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री थे
एक ऐसी विरासत के उत्तराधिकारी जिसे उन्होंने न केवल संभाला, बल्कि अपनी सेवा और सादगी से और समृद्ध किया।

पिता जिनकी जड़ें मगध की मिट्टी में थीं,
बागी कुमार वर्मा को समझने के लिए पहले उनके पिता को जानना होगा।

उपेंद्र नाथ वर्मा 1989-90 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (ग्रामीण विकास) रहे।
वे एक विशिष्ट समाज सुधारक और लेखक थे, वे मूक आवाज पत्रिका के संपादक भी थे।जिन्होंने भारतीय समाज की समस्याओं पर अनेक ग्रंथों की रचना की।

गया के जिला पदाधिकारी ने उनके बारे में कहा था कि उपेंद्र नाथ वर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान देते हुए जिले में 22 उच्च विद्यालय एवं दो महाविद्यालय की स्थापना की।
एक सहायक शिक्षक के पद से लेकर केंद्र सरकार में मंत्री पद तक उन्होंने सदा आम जनता का प्रतिनिधित्व किया।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार ने स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व मंत्री स्व. उपेंद्र नाथ वर्मा की जयंती को राजकीय समारोह का दर्जा दिया है।
यह सम्मान उन्हें उनके असाधारण जनसेवा के लिए मिला था।

बागी कुमार वर्मा विरासत के सच्चे वाहक,

पूर्व मंत्री, खाद्य एवं आपूर्ति, बिहार सरकार, श्री बागी कुमार वर्मा अपने पिता की 11वीं पुण्यतिथि पर आयोजित राजकीय समारोह में उपस्थित होकर उनके कार्यों को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने समाज को एक नई दिशा दी।

बिहार की राजनीति में यह अक्सर देखा जाता है कि बड़े नेताओं की संतानें या तो राजनीतिक जोड़-तोड़ में उलझ जाती हैं, या चकाचौंध में खो जाती हैं।
बागी कुमार वर्मा इसके अपवाद थे।
उन्होंने राज्य सरकार में मंत्री रहते हुए भी वही सादगी और जमीनी जुड़ाव बनाए रखा जो उनके पिता की पहचान थी।
उपेंद्र नाथ वर्मा इंटर कॉलेज (इटवा, बांके बाजार) के अध्यक्ष के रूप में उनका जुड़ाव बताता है कि सत्ता छोड़ने के बाद भी वे शिक्षा और समाज सेवा से विमुख नहीं हुए।
सुदूर बांके बाजार जैसे क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाना यह सत्ता का नहीं, संस्कार का काम है।

मगध की अपूरणीय क्षति
बागी कुमार वर्मा का निधन शेरघाटी और बांके बाजार अनुमंडल के लिए एक गहरी रिक्तता है।

वे उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे जब राजनीति का अर्थ था लोहिया के सिद्धांत, कर्पूरी ठाकुर की सादगी और जनता की सेवा।

उपस्थित लोगों ने लोकरत्न उपेंद्र नाथ वर्मा को देश का प्रखर समाजवादी नेता व जुझारू स्वतंत्रता सेनानी बताया।

उनके पुत्र बागी कुमार वर्मा ने उस परंपरा को जीवित रखा न शोर से, न प्रचार से, बल्कि चुपचाप अपने काम से।

दिल्ली में इलाज के दौरान अंतिम साँसें लेना यह भी बताता है कि उन्होंने अंत तक संघर्ष किया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

आज बिहार की राजनीति में जब हर ओर सत्ता की भूख, कुर्सी की होड़ और विरासत के दुरुपयोग की खबरें आम हो चली हैं ऐसे में बागी कुमार वर्मा जैसे व्यक्तित्व का जाना और भी खलता है।

एक बड़े सवाल के साथ हम उन्हें याद करते हैं:
क्या हमारी राजनीतिक संस्कृति में अब भी वह जगह बची है जहाँ सेवा, सादगी और सिद्धांत को सम्मान मिलता हो?
जहाँ नेता की पहचान उसकी जाति, धन या बाहुबल से नहीं, बल्कि उसके जनसेवा के कार्यों से बनती हो?

बागी कुमार वर्मा ने यह जगह जीवित रखी। उनका जाना उस परंपरा की एक और कड़ी का टूटना है।

"कुछ लोग जाते नहीं वे बस उस मिट्टी में मिल जाते हैं
जिसे उन्होंने अपने जीवन भर सींचा।
बागी कुमार वर्मा मगध की उसी मिट्टी का हिस्सा थे।"

श्रद्धांजलि
परिवार एवं समाज की ओर से बागी कुमार वर्मा जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
उनके परिवार, समर्थकों और मगध क्षेत्र के लाखों लोगों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएँ।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिजनों को यह असह्य वेदना सहने का सामर्थ्य प्रदान करें।

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