एएमयू इंतज़ामिया ने आठ सालों से न कन्वोकेशन कराया है, न ही स्टूडेंट यूनियन कराई
एएमयू इंतज़ामिया ने आठ सालों से न कन्वोकेशन कराया है, न ही स्टूडेंट यूनियन कराई है और ना एलुमिनी मीट करवाया है, यहाँ तक कि केनेडी ऑडिटोरियम में सर सय्यद प्ले भी नहीं हो रहा, केनेडी में जितने भी प्रोग्राम हुए उसमें नाच गानों के प्रोग्राम ज़रूर हुए जिसमें हर दिन लड़ाई हुई मगर इसपर कोई रोक टोक नहीं हुआ, कोई एक्शन नहीं लिया गया, नए आए स्टूडेंटस सर सय्यद प्ले को देख कर ही अपने बानी-ए-दर्सगाह के बारे में कुछ जान समझ पाते थे, मगर यह प्ले भी सर सय्यद बनने को लेकर लड़ाई की भेंट चढ़ गया और बंद हो गया... कैंपस में हो रहा है तो सिर्फ सूफी नाइट (रंगारंग कार्यक्रम) के नाम पर फ़हहाशी का प्रोग्राम जो हर हॉल में बहुत धूमधाम से किया जा रहा, नए आए तालिब-ए-इल्मों को इस अज़ीम इदारे के वक़ार और मायर, अपने हॉल और डिपार्टमेंट की रिच लीगेसी के बार में नहीं मालूम मगर हॉल के प्रोवोस्ट वार्डेन और सीईसी के कॉर्डिनेटर को तो पता है मगर वो रंगारंग कार्यक्रम कर कर इसे पमाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे... ना एएमयू के रिच लेगेसी के बारे में कुछ बताया जा रहा है, ना इसके हेरिटेज को संजोया जा रहा... AMU में डिग्री मिलने के साथ साथ तमीज़ तहज़ीब सीखने को मिलती थी जो इसे बाक़ी यूनिवर्सिटीज से अलग करती थी मगर अब ये सब ख़त्म होने के कगार पर है!
इवेन सेमेस्टर के एग्जाम चल रहे मगर अभी तक ऑड सेमेस्टर के रिजल्ट्स नहीं आए इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है? स्टूडेंट्स जो अपने कोर्स में या फैकल्टी में रैंक लाते उन्हें मालूम तक नहीं होता उनकी क्या रैंक है और ये भी कि टॉप थ्री रैंकर्स को रैंक सर्टिफिकेट भी मिलता है, स्टूडेंट्स के काम छोड़ कर इंतजामिया हर वो काम कर रही जो अपने लिए ज़रूरी है चाहे वो फ़ीता काटना हो या प्रोग्राम में जाना.