मेहनत और लगन उनके जीवन का हिस्सा थी।Tariq Khan सर
बहुत लंबी बातें होती थीं और हर रोज़ होती थीं। आज वर्कशॉप शुरू होनी थी उसका इनॉग्रेशन था। कल मिले थे सब बात की थी। सुबह चलने की तैयारी थी। सुबह बस हम अपनी जगह से निकले civil lines जहां रुके हैं और उन्हें लेने के लिए जा रहे थे चलने के लिए उनका फ्लैट पास में ही है ।
बस 10 से 15 मिनट में मेरे सामने एक पूरी दुनिया पलटी है। बहुत कुछ है जो इतना खाली हो गया है कि मुझे समझ नहीं आ रहा है।
मेहनत और लगन उनके जीवन का हिस्सा थी। उनके सारे काम रुकेंगे नहीं। वो थिएटर को थिएटर नहीं एक मिशन मानते थे। Tariq Khan सर मिशन रुकेगा नहीं।