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अंडमान में बसे बंगाली शरणार्थियों ने उठाई आवाज़।

अंडमान में बसे बंगाली शरणार्थियों ने उठाई आवाज़।
ज़मीन और बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग।

उत्तर तथा मध्य अण्डमान जिले में बसे बंगाली शरणार्थी समुदाय के बीच गहरी चिंता और असंतोष का माहौल बनता जा रहा है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने दशकों से जारी प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार और अंडमान प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
समुदाय का कहना है कि उन्हें भारत सरकार द्वारा विभाजन और विस्थापन के बाद पुनर्वासित किया गया था तथा उन्होंने उत्तर और मध्य अंडमान के दूरस्थ जंगल क्षेत्रों को खेती योग्य भूमि में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समुदाय के लोगों का दावा है कि उन्होंने राष्ट्र-निर्माण और सीमांत क्षेत्रों के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया, लेकिन आज भी वे बुनियादी सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं।
समुदाय के प्रवक्ता का कहना है कि सबसे गंभीर समस्या तब सामने आती है जब दूरदराज़ क्षेत्रों जैसे , , और से लोग इलाज या मेडिकल इमरजेंसी के लिए राजधानी पहुँचते हैं।
उन्होंने कहा,
कई परिवारों को बेहद कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ता है। उन्हें भीड़भाड़ वाली लॉज में ठहरना पड़ता है या बिना किसी उचित आश्रय के दिन बिताने पड़ते हैं। इससे आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियाँ लगातार बढ़ रही हैं।
समुदाय का आरोप है कि राजधानी में अभी तक उनके लिए कोई समर्पित सरकारी ट्रांज़िट आवास, राहत केंद्र या कल्याण सुविधा उपलब्ध नहीं कराई।

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