कविता : सड़क
सड़क केवल रास्ता नहीं होती,
यह कहानियों की एक खुली किताब होती है।
हर मोड़ पर एक किस्सा ठहर जाता है,
हर कदम पर एक सफर नया जन्म लेता है।
सुबह की पहली किरण जब इसे छूती है,
तो यह सुनहरी चादर ओढ़ लेती है,
दौड़ते कदमों की आहट में
जीवन की रफ्तार झलकने लगती है।
कहीं स्कूल जाते बच्चों की हंसी है,
तो कहीं काम पर जाते लोगों की जल्दी,
किसी के सपनों की शुरुआत है यह,
तो किसी की मजबूरी की अगली कड़ी।
दोपहर में धूप जब तपती है,
तो सड़क तपकर भी मुस्कुराती है,
थके हुए पांवों को सहारा देकर
चुपचाप अपना फर्ज निभाती है।
यह सड़क जानती है हर दर्द, हर खुशी,
यह सुनती है हर आवाज़ बिना बोले,
किसी के आँसू इसमें खो जाते हैं,
तो किसी के गीत इसमें घुल जाते हैं।
शाम होते ही यह रंग बदल लेती है,
लाल-पीली रोशनी में जगमगाती है,
गाड़ियों की कतारों के बीच
शहर की धड़कन बन जाती है।
कभी यह सुनसान भी हो जाती है,
रात के सन्नाटे में खो जाती है,
तब इसके सीने पर चाँदनी उतरती है,
और यह खामोशी में भी कुछ कह जाती है।
यह सड़क गवाह है अनगिनत कहानियों की,
मिलन और बिछड़न के अफसानों की,
कभी किसी ने यहां वादा किया,
तो किसी ने यहां रिश्ता तोड़ा।
किसी के लिए यह मंज़िल तक का रास्ता है,
तो किसी के लिए सिर्फ एक पड़ाव,
लेकिन यह कभी रुकती नहीं,
न ही करती है कोई हिसाब।
बारिश में जब बूंदें गिरती हैं,
तो सड़क आईने सी चमक जाती है,
हर एक बूंद में जैसे
पुरानी यादें झिलमिला जाती हैं।
यह सड़क सिखाती है हमें,
चलते रहना, कभी न रुकना,
गिरकर भी संभल जाना,
और हर दर्द में मुस्कुराना।
क्योंकि सड़क जानती है,
कि मंज़िल से ज्यादा जरूरी है सफर,
हर कदम एक नई सीख देता है,
हर मोड़ पर मिलता है नया असर।
सड़क पर चलते-चलते हम
खुद को भी पहचान लेते हैं,
भीड़ के बीच कहीं
अपने ही अरमानों को जान लेते हैं।
इसलिए सड़क को सिर्फ रास्ता मत समझो,
यह जिंदगी का आईना है,
जो हर पल हमें दिखाता है
कि सफर ही असली नगीना है।