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देश पर तेल संकट का खतरा या सरकार की बड़ी तैयारी? जनता से ईंधन बचाने की अपील

देश में बढ़ती वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल, गैस या जरूरी सामानों की कोई कमी नहीं है। सरकार के मुताबिक भारत के पास करीब 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है, जबकि एलपीजी का 45 दिनों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

सरकार ने यह भी बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और देश आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ने के बावजूद सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे हैं, जबकि सरकारी तेल कंपनियां भारी आर्थिक नुकसान झेल रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन की बचत को आदत बनाएं। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और कारपूलिंग का ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह दी। साथ ही किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 50% तक कम करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और सोलर पंप के इस्तेमाल को बढ़ाने का आग्रह किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ईंधन बचाना सिर्फ आज की जरूरत नहीं बल्कि देश की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक संकट लंबे समय तक चलता है तो भारत को आत्मनिर्भर और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। सरकार की प्राथमिकताओं में ऊर्जा आपूर्ति को लगातार जारी रखना, आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

सरकार ने MSME और उद्योगों को राहत देने के लिए 2.55 लाख करोड़ की इमरजेंसी क्रेडिट योजना को मंजूरी दी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि घबराकर अतिरिक्त खरीदारी न करें क्योंकि देश में खाद्य सामग्री, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

उर्वरकों को लेकर भी सरकार ने बड़ा दावा किया है। 11 मई तक देश में कुल खाद भंडार 199.65 लाख टन बताया गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के 178.58 लाख टन से काफी ज्यादा है। खरीफ 2026 के लिए अनुमानित जरूरत 390.54 लाख टन है, जिसके मुकाबले मौजूदा स्टॉक 51% से अधिक है, जबकि सामान्य स्थिति में यह स्तर लगभग 33% रहता है।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में जिम्मेदार खपत यानी जरूरत के हिसाब से उपयोग की संस्कृति अपनाना बेहद जरूरी होगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश मजबूत और आत्मनिर्भर बना रहे।

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