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निरंतरता (Consistency) ही सफलता की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है।

निरंतरता (Consistency) ही सफलता की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है।
जो गिरकर फिर उठना सीख जाता है, वही एक दिन इतिहास लिखता और
इतिहास गवाह है कि आंदोलन एक दिन में सफल नहीं होते। उसके धीरे-धीरे जनसमर्थन जुटाना पड़ता हैं, संघर्ष करना पड़ता हैं, उपहास सहना पड़ता हैं, बाधाओं से लड़ना पड़ता हैं और तब जाकर अंततः विजय प्राप्त करते हैं। भारत का स्वतंत्रता आंदोलन।
शुरुआत में यह कुछ जागरूक लोगों की आवाज़ था। धीरे-धीरे यह जन-जन का आंदोलन बना। पहले छोटी सभाएँ हुईं, फिर सत्याग्रह हुए, फिर लाखों लोग जुड़े। वर्षों तक संघर्ष चला, अनेक बलिदान हुए, तब जाकर देश आज़ाद हुआ।
ऐसे ही हम अपने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को ही लें तो पहले यह कुछ लोगों की मांग थी, लेकिन धीरे-धीरे पहाड़ के गांव-गांव से आवाज़ उठी। मातृशक्ति, युवा, छात्र, कर्मचारी, हर वर्ग सड़कों पर उतरा। लंबे संघर्ष, बलिदान और जनदबाव के बाद अलग उत्तराखंड राज्य बना और अब फिर इतिहास अपने आप को दोहराता दिख रहा है स्थायी राजधानी गैरसैंण का आंदोलन भी है धीरे धीरे अपने निर्धारित लक्ष्य की और बढ़ रहा है
यह संघर्ष कुछ लोगों को छोटा दिख सकता है, पर हर बड़े परिवर्तन की शुरुआत छोटी ही होती है। जब जनता जागती है, जब लोग अपने हक के लिए लगातार खड़े रहते हैं, जब आवाज़ गाँव-गाँव से उठती है, तब सत्ता को सुनना ही पड़ता है।
गैरसैंण केवल राजधानी नहीं, पहाड़ की अस्मिता, संतुलित विकास, जनभावनाओं का प्रतीक और 42+1 सहिदों को सच्ची श्रद्धांजलि है..
यदि संघर्ष निरंतर, शांतिपूर्ण और संगठित रहेगा, तो आज की छोटी चिंगारी कल उत्तराखंड के हर एक गाँव शहर मे ज्वालामुखी की तरह भी बन सकती है।

धीरे चलने वाला आंदोलन भी इतिहास बदल देता है, यदि उसके पीछे जनता का विश्वास और संकल्प हो।
जय भारत
जय उत्तराखंड
जय पहाड़

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