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"मोतिहारी अग्निकांड: जब एक परिवार की दुनिया राख हो गई"दो मासूम बच्चे और एक युवा कर्मचारी तीन जिंदगियाँ एक रात में निगल गई आग; पिता बेबस देखता रहा,

विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार

मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक ऐसी खौफनाक त्रासदी घटी है जिसने पूरे इलाके की रूह को हिलाकर रख दिया।

कुंडवा चैनपुर थाना क्षेत्र के बड़हरवा फतेह मोहम्मद गांव में शुक्रवार की रात एक किराना दुकान में लगी भीषण आग ने तीन जिंदगियाँ निगल लीं
एक मासूम बालक, एक बालिका और एक दुकान कर्मचारी।

यह महज एक आग की खबर नहीं है।
यह एक पिता की चीख है, जो अपने बच्चों को देखने के लिए जलते गेट को तोड़कर अंदर घुसा और वहाँ पाया कि उसके खून से उसके दो बच्चे एक-दूसरे से लिपटे राख हो चुके थे।

घटना का पूरा विवरण,
पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में शुक्रवार देर रात भीषण अग्निकांड हुआ।
ढाका प्रखंड के बड़हरवा फतेह मोहम्मद गांव में एक होलसेल दुकान में लगी आग ने देखते ही देखते दो मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
इस हादसे में दो मासूम बच्चों समेत तीन लोगों की जलकर मौत हो गई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, राजकुमार साह के मकान के निचले हिस्से में किराना दुकान थी, जबकि ऊपरी मंजिल पर परिवार रहता था।
रात करीब 11 बजे दुकान में अचानक आग लग गई जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया।
पिता राजकुमार साह ने बताया:
"सब मना कर रहे थे, मत जाओ, अभी आग जल रही है, फँस जाओगे।
मैंने कहा अब इंतजार नहीं कर सकते।
गेट राख बन गया था, एक धक्के में टूट गया।

अंदर जाते ही मेरे होश उड़ गए।
मेरे सामने सृष्टि और रूद्र कंकाल बने लिपटे हुए थे।
ऐसा लग रहा था कि दोनों एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे थे।
उनसे करीब दो फीट की दूरी पर स्टाफ प्रिंस का कंकाल पड़ा था।"

मृतकों की पहचान,
पुलिस के मुताबिक, मृतकों में किराना व्यवसायी राजकुमार साह की 12 वर्षीय पुत्री सृष्टि कुमारी, 8 वर्षीय पुत्र रुद्र कुमार, और 28 वर्षीय सेल्समैन पिंटू कुमार सिंह (उर्फ प्रिंस) शामिल हैं।

राजकुमार साह ने बच्चों को बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगाई, लेकिन तब तक सब कुछ राख हो गया था।
ग्रामीण विजय बैठा भी आग बुझाने में मदद करने की कोशिश के दौरान झुलस गए।

फायर ब्रिगेड देर से आई, जान नहीं बचा सकी
घटना की सूचना पर अग्निशमन दस्ता देर से पहुँचा।
टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
सुबह आठ बजे तक फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने में जुटी रही
तब तक तीन जिंदगियाँ जलकर राख हो चुकी थीं।

यहाँ एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है रात 11 बजे लगी आग और सुबह 8 बजे काबू? करीब 9 घंटे! क्या समय पर फायर ब्रिगेड पहुँचती तो तीन जानें बचाई जा सकती थीं?

संपत्ति का नुकसान,
इस आगजनी में डेढ़ करोड़ से अधिक का सामान जलकर खाक हो गया।
आग इतनी भयावह थी कि पड़ोस की एक अन्य किराना दुकान भी इसकी चपेट में आ गई, जिससे लाखों का सामान जलकर खाक हो गया।

आग का कारण अभी अनुत्तरित
आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालाँकि प्रशासन ने जाँच के बाद ही कुछ स्पष्ट होने की बात कही है।

सवाल जो उठने चाहिए
पहला सवाल:
बिहार में हर साल गर्मियों में दर्जनों अग्निकांड होते हैं फिर भी फायर ब्रिगेड की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था क्यों नहीं सुधरती?

दूसरा सवाल:
आवासीय इमारत के नीचे होलसेल किराना-स्टोर क्या इसके लिए उचित अग्निशमन सुरक्षा उपकरण (स्प्रिंकलर, अलार्म) अनिवार्य नहीं होने चाहिए?

तीसरा सवाल:
सिकरहना डीएसपी ने दो मंजिला मकान में आग लगने की पुष्टि की।
क्या जिला प्रशासन पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा चार चार लाख रुपए मृतक के परिजनों को दिया है।

गाँव में पसरा मातम
घटना के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गाँव में शोक की लहर दौड़ गई है और लोग इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध हैं।

12 साल की सृष्टि और 8 साल का रुद्र दो भाई-बहन जो मौत के आगोश में भी एक-दूसरे को थामे रहे।
यह तस्वीर किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देगी।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकारी तंत्र भी झकझोरा जाएगा, या अगले अग्निकांड का इंतजार किया जाएगा?

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