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158 दिन का इंतजार, फिर भी समाधान नहीं: नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी, सरकार पर बढ़े सवाल

देहरादून में पिछले कई महीनों से चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन अब सरकार के लिए गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। 158 दिनों से धरना और 23 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों की स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से सोमवार शाम हुई मुलाकात भी बेनतीजा रही। बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया में कुछ राहत और ओवरएज अभ्यर्थियों को दो वर्ष की आयु छूट देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन अभ्यर्थी इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया ने हजारों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब राज्य में 2500 से अधिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं, तो आखिर भर्ती प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है?

हालांकि आंदोलनकारियों की वर्षवार भर्ती और आयु छूट जैसी मांगों को कई लोग जायज मान रहे हैं, लेकिन राज्य से बाहर के अभ्यर्थियों पर रोक लगाने की मांग पर बहस भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की बहस अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों और समान अवसर के अधिकार को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सबसे बड़ा सवाल सरकार की संवेदनशीलता को लेकर खड़ा हो रहा है। महीनों से सड़क पर बैठे अभ्यर्थियों को आखिर इतनी लंबी प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ी? क्या सरकार केवल आंदोलन उग्र होने के बाद ही संवाद के लिए आगे आती है? परेड ग्राउंड की पानी की टंकी पर चढ़े प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि युवाओं में निराशा लगातार बढ़ रही है।

अब देखना होगा कि सरकार केवल आश्वासन तक सीमित रहती है या स्वास्थ्य व्यवस्था में खाली पड़े पदों को भरने के लिए कोई ठोस और समयबद्ध रोडमैप भी सामने लाती है।

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