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पश्चिम बंगाल में नई शुरुआत: भारतीय न्याय संहिता चालू हो गई सुवेंदु सरकार का बड़ा फैसला

कोलकाता, ११ मई २०२६: नई भाजपा सरकार ने आज राज्य में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानूनी बदलाव का संदेश जोर-शोर से फैलाना शुरू कर दिया है। भारतीय न्याय संहिता चालू हो गई यह संदेश आज सुबह से सरकारी स्तर पर, पुलिस विभाग में और सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने आज अपनी पहली कैबिनेट बैठक में फैसला लिया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को पश्चिम बंगाल में पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन तीनों नए आपराधिक कानून १ जुलाई २०२४ को पूरे देश में लागू हो चुके थे, जो पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और साक्ष्य अधिनियम की जगह ले चुके हैं।
पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार (ममता बनर्जी) ने इन कानूनों का खुलकर विरोध किया था। इन्हें काला कानून करार देते हुए समीक्षा समितियां गठित की गईं और विधानसभा में विरोध प्रस्ताव भी पास किए गए थे। परिणामस्वरूप राज्य में इन कानूनों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
२०२६ के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद ९ मई २०२६ को सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। आज ११ मई को हुई पहली कैबिनेट बैठक में नई सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब पश्चिम बंगाल केंद्र के कानूनों और योजनाओं से पूरी तरह जुड़ेगा।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए इन महत्वपूर्ण कानूनों को लागू नहीं किया। नई सरकार इसे सुधार रही है।
इस फैसले का क्या मतलब है?
यह फैसला सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से एक स्पष्ट संदेश भी है। सरकार का लक्ष्य है:
पुलिस, न्यायालयों और प्रशासन को नए कानूनों के अनुसार काम करने के लिए तैयार करना।
राज्य को देश के बाकी हिस्सों के साथ आपराधिक न्याय व्यवस्था में एकाकार करना।
आम नागरिकों को यह आश्वासन देना कि अब अपराध और न्याय की नई प्रक्रिया लागू हो गई है।
साथ ही, आज की बैठक में आयुष्मान भारत जैसी केंद्र की अन्य योजनाओं को भी प्रभावी ढंग से लागू करने और सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर जोर देने का फैसला लिया गया।
राजनीतिक महत्व
यह कदम नई सरकार द्वारा पुरानी व्यवस्था में बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। जो लोग लंबे समय से पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंतित थे, उनके लिए यह फैसला राहत और उम्मीद दोनों का संदेश दे रहा है।
टिप्पणी:
राष्ट्रीय स्तर पर लागू हो चुके कानूनों को राज्य स्तर पर लागू करना केंद्र-राज्य संबंधों में संवैधानिक अनिवार्यता भी है। नई सरकार इसे प्राथमिकता देते हुए तुरंत अमल में ला रही है।
Tapendra
Online Journalist
शुभकामनाएं सत्य, न्याय और पारदर्शिता की राह पर।

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