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यह बयान संवैधानिक मूल्यों और समावेशी शासन की बहस को फिर से केंद्र में लाता है। Jamiat Ulema-e-Hind के अध्यक्ष Mahmood Madani ने पश्चिम बंगाल के नए मुख

यह बयान संवैधानिक मूल्यों और समावेशी शासन की बहस को फिर से केंद्र में लाता है। Jamiat Ulema-e-Hind के अध्यक्ष Mahmood Madani ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari से सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करने की अपील करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का दायित्व पूरे राज्य के प्रति होता है, किसी एक समुदाय के प्रति नहीं।

मुख्य बिंदु:

मुख्यमंत्री पद की शपथ संविधान के प्रति निष्ठा और निष्पक्ष प्रशासन का वचन होती है।

धर्म आधारित राजनीतिक बयानबाज़ी पर सवाल उठाए गए।

विकास, रोजगार, शिक्षा, सड़क और कानून-व्यवस्था को प्राथमिक मुद्दा बताया गया।

जमीयत ने कहा कि वह किसी भी ऐसी सरकार का समर्थन करेगी जो संविधान और नागरिक अधिकारों के अनुसार काम करे।
भारतीय लोकतंत्र में यह बहस नई नहीं है। अक्सर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच यह प्रश्न उठता रहा है कि शासन की प्राथमिकता पहचान-आधारित राजनीति होनी चाहिए या सार्वभौमिक विकास और प्रशासनिक निष्पक्षता। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 समानता, भेदभाव-निषेध और जीवन के अधिकार की गारंटी देते हैं, इसलिए सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं के बयान और नीतियाँ स्वाभाविक रूप से अधिक जांच के दायरे में रहती हैं।

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