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अपना घर आश्रम ने कराया पंद्रह वर्ष से बिछड़ने भाई बहिन का मिलन ,और दादा को पौत्र -पौत्री से मिलाया

पन्द्रह वर्ष पूर्व हिंडोन से एक मानसिक विमंदित लावारिस महिला जिसकी उस समय आयु लगभग चालीस वर्ष रही होगी ,को अपना घर आश्रम में आश्रय दिया गया था ।उस समय अपना घर आश्रम कोटा का प्रारंभिक दौर ही था और उसका संचालन नारी निकेतन नान्ता के छोटे से हिस्से में होता था ।इस महिला ने अपना नाम आजो बताया लेकिन अन्य कोई जानकारी यह नहीं दे पा रही थी ।
तभी से निरन्तर मनोचिकित्सकों के निर्देशानुसार उसकी देखरेख की जा रही थी ।निरंतर इलाज के बाद पिछले कुछ समय से वह अपने परिवार के विषय में कुछ जानकारियां देने लगी और काउंसलिंग के दौरान उसने बताया कि वह चित्तौडगढ़ जिले के देवराम जी का चन्देरिया की रहने वाली है ।केवल इस सूचना के आधार पर वहाँ के स्थानीय थाने में सूचना देने पर पुलिस थाने द्वारा अपना घर आश्रम का सहयोग किया और पता लगाया कि वहाँ से वर्षों पूर्व से एक महिला लापता है ।थाने के माध्यम से अपना घर की पुनर्वास टीम ने उसके परिजनों से संपर्क कर आजो का फोटो दिखाया तो तुरंत ही उसके भाई और बहिन में उसे पहचान लिया ।
आजो का भाई फतह लाल और दो बहिनें बाली बाई और शांति बाई अपना घर आश्रम पहुंचे तो अपनी बहिन से मिलकर बहुत प्रसन्न थे ।उन्होंने बताया कि मानसिक विमंदित होने के कारण 2011 में वह अचानक घर से ग़ायब हो गई थी ।इस बीच उन्होंने उसे ढूँढने के प्रयास भी किए लेकिन असफलता ही मिली ।पुलिस के माध्यम से जब उन्हें आजो के अपना घर आश्रम कोटा में होने की सूचना मिली तो सभी घरवालों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा ।यहाँ अपनी बहिन को स्वस्थ देख कर उन्होंने अपना घर आश्रम के इस कार्य की बहुत सराहना की ।
इसके साथ ही अभी गत माह ही नयापुरा थाना क्षेत्र से लगभग अस्सी वर्षीय कल्याण मीणा को भी लावारिस अवस्था में अपना घर लाया गया था ।ये अपना पता और परिजनों के विषय में कुछ भी नहीं बता पा रहे थे ।केवल इटावा के विषय में ही कुछ बता पाए ।अपना घर की पुनर्वास टीम ने इटावा में संपर्क कर परिजनों तक उनके कोटा में होने की सूचना दी तो उनके पौत्र सोनू मीणा और पुत्री काली मीणा तुरंत कोटा पहुंचे और अपने दादा से स्नेहवश लिपट गए ।दादा और पौत्र पौत्री के मिलन का दृश्य वास्तव में अद्भुत था ।

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