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कलयुगी बेटों की बेरुखी: 2 लाख देकर मां को वृद्धाश्रम छोड़ा

गिरिडीह: मदर्स डे पर जहां पूरी दुनिया मां के प्रति सम्मान व्यक्त कर रही है, वहीं गिरिडीह से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। मोकामा के एक प्रतिष्ठित बिजनेसमैन की पत्नी शांति देवी आज अपनों के ही दिए जख्मों के कारण वृद्धाश्रम में आंसू बहाने को मजबूर हैं।
प्रमुख बिंदु:
बहू के कहने पर मां का त्याग: आरोप है कि बहू के उकसाने पर बेटों ने अपनी जन्मदात्री मां से मुंह मोड़ लिया।
कागज पर लिखा 'मतलब नहीं': बेटों ने न केवल मां को आश्रम छोड़ा, बल्कि लिखित में यह तक दे दिया कि अब उनका 'मां से कोई मतलब नहीं' है।
2 लाख देकर पल्ला झाड़ा: आश्रम में मां की जिम्मेदारी उठाने के बजाय 2 लाख देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
संघर्ष का मिला ये सिला: जिस मां-बाप ने मेहनत कर बेटों को इस काबिल बनाया कि वे बिजनेसमैन बन सकें, आज उन्हीं बेटों ने मां को बेसहारा कर दिया है।
वृद्धाश्रम की दीवारों के पीछे शांति देवी की भीगी आंखें आज समाज और ममता के रिश्तों पर गहरे सवाल खड़े कर रही हैं।

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